Thursday, February 26, 2026
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महानायक मातादीन बाल्मिकि 1857 की क्रांति के सूत्रधार

मूकनायक/ देश

“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”


जन्म 29/11/1825
शहादत 8/4/1857

  सब लोग जानते हैं 1857 की आजादी की लड़ाई की बगावत करने की प्रेरणा मंगल पांडे को मातादीन बाल्मीकि से मिली। वरना पांडे जी जीवन भर अंग्रेजों की नौकरी करते रहते। लेकिन मातादीन बाल्मीकि को अछूत होने के नाते भुला दिया गया।
  पूर्वज मेरठ के रहने वाले थे। रोजी-रोटी की तलाश में कोलकाता पहुंच गए ।जो उस समय ब्रिटिश भारत की राजधानी थी ।वैसे तो क्रांति की तारीख 31 मई निश्चित थी लेकिन 29 मार्च 1857 को विद्रोह हो गया। क्योंकि वाक्य यह हो गया की बैरक छावनी में कारतूसओ की फैक्ट्री में काम करने वाले अधिकतर फौजी और ब्राह्मण द्वारा बनाई गई अछूत जातियों से थे। उन्हीं में से एक मातादीन वाल्मिक। सैनिक छावनी पहुंचे प्यास लगने पर मंगल पांडे से पीने के लिए पानी मांगा जो मेरठ से ट्रांसफर होकर बैरकपुर आया था।
  ऊंची जाति का  वाले मंगल पांडे ने पानी पिलाने से इनकार कर दिया। चिड़कर मातादीन भोले कैसा है तुम्हारा धर्म एक प्यासे को पानी पिलाने की इजाजत नहीं देता और गाय जिसे तुम माता कहते हो लेकिन गाय की चर्बी लगे कारतूस ओ बंदूक से बहार दांतो से खींचते हो।
    यह सुनकर सैनिक बौखला गए ।विद्रोह उठा और विद्रोह की चिंगारी ने सारे भारत में ज्वाला का रूप ले लिया ।विद्रोहियों पर चार्जसीट बनाई। चार्जि शीट में सबसे पहले नाम मातादीन बाल्मीकि का था ।रिकॉर्ड्स में ब्रिटिश सरकार बनाम मातादीन भंगी था।
  मातादीन को विद्रोह का सूत्र धार मानते हुए उस को ही 8 अप्रैल 1857 को बैरकपुर छावनी प्रांगण में ही फांसी दे दी गई और कोर्ट मार्शल बाद में हुआ था।
    भारतीय इतिहास में शायद यह पहला मामला होगा जिसमें कोर्ट मार्शल बाद में हुआ और फांसी पहले दे दी गई ।लेकिन ब्राह्मण इतिहासकारों ने घोटाला करके इतिहास लेखन में भेदभाव के चलते मातादीन भंगी का नाम ही हटा दिया गया। जैसा कि दूसरे दलित और बहू जनों के इतिहास को भी इसी तरह छुपाया गया है।

जबकि इंग्लैंड सरकार के पास सारा ब्यौरा सुरक्षित है।

मातादीन बाल्मीकि को सादर नमन ।

मोती राम MA
पूर्व अधिकारी
SHAHDARA
9910160521

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