Thursday, February 26, 2026
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बाबा साहब ने कहा था कि “शिक्षा शेरनी का दूध है जो पियेगा वही दहाड़ेगा”

मूकनायक /देश

“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”

शिक्षा वो मार्ग है , जो इंसान की तरक्की और सभ्य होने के रास्ते खोलती हैं। आज हम जो जिंदगी जी रहे है , वो सारे रास्ते शिक्षा के द्वार से होकर ही गुजरते हैं। शिक्षा के बिना सब अधूरा और खाली हैं। शिक्षा एक ऐसा हथियार है जो इंसान को इंसान बनाता है, उसको जीना सिखाता है। और उसको सही और गलत की पहचान करवाता है। शिक्षा के द्वारा ही हम अपने अधिकारों को पहचानते हैं। समाज के लिए हमारी क्या क्या ड्यूटी बनती हैं , समाज को जागृत कैसे करना है। ये सब हम शिक्षित होकर ही सीखते हैं। जरूरी नहीं है कि हम शिक्षित होकर सिर्फ आत्मनिर्भर बनें जीने के लिए आत्मनिर्भर बनना कितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है समाज को नई दिशा देना और उनको सही मार्ग दिखाना भी है।यदि बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर ने भी सिर्फ आत्मनिर्भर बनने का सोचा होता और समाज को सही मार्ग का रास्ता ना बताया होता या उनके अधिकारों के लड़ाई ना की होती जो की उनकी कलम की ताकत थी, तो आज हम ये जीवन ना जी रहे होते । खासकर हमारे समाज की महिलाओं को उनको सुबह शाम नमन करना चाहिए। उन्होंने हमारे लिए अपने चार चार बच्चों की कुर्बानी दी हैं। अपनी धर्मपत्नी को गरीबी का जीवन जीने पर मजबूर कर दिया हो। बाबा साहेब ने ये सबकुछ अपने समाज के हक के लिए किया है। सिर्फ और सिर्फ शिक्षा के दम पर ही।कलम की ताकत बहुत बड़ी होती है। जो इससे पहचान गया हो वही इसकी कीमत लगा सकता है।
जय भीम जय भारत

लेखक: नीलम दलित चिंतक , जिला ब्यूरो चीफ मूकनायक सोनीपत

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