मूकनायक
देश
“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”
यह नारा किसी भयभीत व्यक्ति के भय व अपनी गुस्ताखीयों से , खुद क्षुब्ध होकर हताश-निराश ,कम संख्या बाले का भय रूदन है। अगर हम इस नारे की गहराई में जायें तो हम पायेंगे कि बंटने का डर हम बहुलोक जनों के लिए नहीं है क्योंकि मनुवादी षणयन्त्र ने हमें तो पहले ही,वर्ण भेद,जाति भेद, नस्लभेद, रंग भेद, भाषा भेद ,क्षेत्र भेद,न जाने कितने भेदानुभेद में शदियों से बांट रखा है ।जो पहले से ही विभाजित हैं ओर अभी तक कटे नहीं है, उन्हें कटने का कोई डर/भय न दिखाओ। यथार्थ में यह नारा पहले से ही विभाजित बहुजन समाज के लिए नहीं है। यह नारा तो सवर्ण लोगों के लिए है क्योंकि वे ही 15%हैं। हम जानते हैं कि लोकतांत्रिक राज व्यवस्था में 51%बहुमतीय जादूई आंकड़ा इन के पास नहीं है, तभी इनके पुरखे लोकतन्त्र का विरोध कर रहे थे। जब महामानव बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी के ओजस्वी तर्कों के समक्ष इनका विरोध सफल नहीं हो पाया तो इन्होंने हिन्दू का लबादा ओढ़कर,कम संख्या बाले सवर्णों ने फर्जी अधिक संख्या दिखाने के लिए , बहुजन समाज का वोट हथियाने हेतु, केवल सत्ता प्राप्ति हेतु, यथार्थ में,अनु सूचित जाति , जनजाति, पिछड़े वर्ग को फर्जी हिन्दू धर्म का सड़ा गला , छुआछूत, ऊंच-नीच,असमानता, कुतर्की, आडम्बरी, अमानवीय दुर्गन्ध युक्त लवादा आजादी के बाद से अब तक पहना रखा है। लेकिन बहुजन समाज के महापुरुषों कै शौर्य मय संघर्ष से बहुजन समाज इनके षणयन्त्रों को समझ चुका है, हिन्दू शब्द का लबादा बहुजन समाज ने उतार फेका है,अब वोटों की राजनीति में बहुजन समाज हिन्दू -हिन्दू के झांसे में नहीं आयेगा। जब सवर्ण के साथ हिन्दू बन कर बहुजन समाज नहीं आयेगा तो बिचारा,15%सवर्ण कहां जायेगा। दसकों से सत्ता की मलाई खाने वाला ,बिचारा सत्ता से दूर चला जायेगा। वास्तव में स्वर्णों के हाथ से सत्ता छिन जाने का भय ,इस नारे में स्पष्ट झलक रहा है। नारे के अन्दर कुछ ओर ही छुपा हुआ है। यह हैं * नारे की हकीकत— -“बहुजन समाज हम से दूर जायेगा तो हम सत्ता से दूर चले जायेंगे।”* यह पीड़ा है सवर्ण समाज की , यह घबराहट है सवर्ण समाज की। बेचारे मनुवादी हिन्दू शव्द के लबादे के फट जाने के बाद सनातनी चादर लिए फिर रहे हैं। लेकिन अब बहुजन समाज किसी झांसे में नहीं आ रहा है। देखों !सवर्ण भाई हम बहुजन समाज के लोग दसकों से आपको अपना वोट दे कर ,आपको सत्ता के मन्दिर भेजते आये हैं । अब आप ईमानदारी से, अपनी छाती पर हाथ रख कर बताओं क्या कभी आपने सत्ता के मंदिर का प्रसाद कभी बहुजन समाज को खिलाया है? आप सत्ता के मंदिर का प्रसाद स्वयं अकेले ही खाते रहे हैं। अब राजपाट की लड़ाई बहुजन समाज खुद अपने वल-बूते पर , अपने जन संख्या बल पर लड़ें गे । बहु लोक जन समाज का असली नारा निम्न वत है । “संगठित रहोगे , तो सत्ता पाओगे।” “जब सत्ता पाओगे, तभी समस्याओं से निजात पाओगे।” । भवतुसब्बमंगलम्
लेखक: भगवत प्रसाद बौद्ध झांसी

