मूकनायक/ देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
बौद्ध संस्कार के अनुसार प्रत्येक धम्म कार्यक्रम का प्रारंभ त्रिशरण -पंचशील ग्रहण करके होता है।
धम्म देशना व धम्म चर्चा के दौरान निरव शान्ति व अनुशासन होना बौद्धों के लिए आवश्यक है। हल्ला गुल्ला,शोर- बकोर आदि अवांछित है। जब तक धम्म देशना- प्रविचय सम्पन्न नहीं हो तब तक बीच में खाना-पीना देना धम्म देशना व प्रविचय में बाधा डालना है। इसलिए खाना-पीना कार्यक्रम के बाद होना है। देशना व प्रवचन के समय खाना देना-लेना और खाना अबौद्ध की पहचान है। ऐसे अनुचित व्यवहार करने वाले व्यक्ति को धम्म में श्रद्धा कम होती है। कार्यक्रम तभी संपन्न होगा, जब “धम्मपालन” गाथा का संगायन पूरा होगा।
धम्मपालन गाथा का संगायन औपचारिकता नहीं है। वह बौद्धों के लिए संकल्प है। अनाड़ी और अबौद्ध लोग धम्मपालन गाथा को समापन गाथा कहते है। ऐसी मान्यता बिलकुल अनुचित है।
धम्मपालन गाथा के माध्यम से उपासक/ उपासिका अपने विश्वास को दोहराते है, उनके मन में बुद्ध के उपदेश में कोई संदेह नही रहता हैं और बुद्ध के धम्म संक्षिप्त में ग्रहण करते है-
“सब्बपापस्स अकरणं,
कुसलस्स उपसम्पदा।
सचित्त परियोदपनं,
एतं बुद्धान सासनं।।”
Ref: बुद्ध ने आनंद को जेतवन- श्रावस्ती में कहा: बुद्ध वग्गो 14: 5 :गाथा: 183
बौद्ध दर्शन के अनुसार अकुशल कर्मों का करना अर्थात दुराचरण करना ही पाप है।
कुशल कर्मों का करना अर्थात सदाचार करना ही पुण्य है। बुद्धों की यही शिक्षा है।
उपासक व उपासिकाएं श्रद्धा और विश्वास प्रकट करते है कि बुद्ध की शिक्षा सदाचार है।
आगे है-
“धम्म चरे सुचरितं,
न तं दुच्चरितं चरे ।
“धम्मचारी सुखं सेति,
अस्मिं लोके परम्हिच ।।”१६९
-लोकवग्गो: धम्मपद
Ref:बुद्ध ने महाराज शुद्घोदन को निग्रोधाराम- कपिलवस्तु
में कहा:लोक वग्गो: 13:3:गाथा : 169
–
“न तावता धम्मधरो,
यावता बहु भासति।
स वे धम्मधरो ,
यो धम्मं नप्पमज्जति।”- २५९
– धम्मट्ठ वग्गो: धम्मपद
Ref: एकूदान थेर के संदर्भ में बुद्ध ने भिक्षुओं को जेतवन- श्रावस्ती में कहा:धम्मट्ठ वग्गो: 19:4:गाथा: 259
अंत में –
धम्मपालन गाथा का संगायन करके बौद्ध उपासक व उपासिकाएं संकल्पबद्ध होते हैं –
“नत्थि में सरणं अञ्ञं,
बुद्धों मे सरणं वरं,
धम्मो मे सरणं वरं,
संघो मे सरणं वरं,
एतेन सच्चवज्जेन होतु
मे (ते) जयमंगलं।”
संकल्प: अपने लिए” मे ” और दूसरे के लिए “ते” शब्द का प्रयोग करना होगा।
इस सुस्पष्ट संकल्प के साथ बौद्धों के कार्यक्रम सम्पन्न होता है। यही बौद्धों की परंपरा है। इस संस्कार को शुद्ध रूप से बनाए रखना प्रत्येक बौद्ध उपासक व उपासिकाओं का कर्त्तव्य है।
नमो बुद्धाय🙏🏻🙏🏻🙏🏻
रवि शेखर बौद्ध, मेरठ संभाग प्रभारी ,मूकनायक 8.11.2024

