मूकनायक
देश
“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”
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जीवन भर मनुष्य सम्पत्ति जोड़ने की फिराक में रहता है, परंतु वह स्वयं व परिवार के सुखमय जीवन के लिए अक्सर जोड़ी हुई सम्पत्ति का सदुपयोग करने में कंजूसी करता है और आनंद, सुख व चैन से वंचित रहता है ।
जबकि वृद्धावस्था के अंतिम समय में करोड़ों रुपए खर्च करके जीने के लिए एक घंटे का समय भी उस सम्पत्ति से खरीदने में असमर्थ रहता है जिसके फलस्वरूप जीवन के एक एक पल को आनंद से जीना ही मानव के लिए हितकारी है । इसलिए पैसा कमाएं, परंतु उस पैसे का जीवन में आनंद भी उठाए क्योंकि जीने का मौका भविष्य में नहीं, बल्कि वर्तमान में है
लेखक:
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
हरियाणा प्रदेश प्रभारी मूकनायक

