Thursday, February 26, 2026
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“गुलाम”

मूकनायक

देश

*राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा*


मैंने तेल का दीपक जलाकर तेल की एक बूंद भी व्यर्थ नहीं जलायी।
पटाखे जलाने के लिए प्रदूषित हवा नहीं।
जिन्होंने पटाखे छोड़े, करोड़ों तेल के दीपक जलाए, गुलाम परंपरा के नियमों का पालन किया।
सचमुच, गुलामी का जश्न मनाते हुए उन्होंने करोड़ों रुपये जला दिये।
यह संसार मूर्खों का बाजार है, इस बाजार में, विज्ञान के युग में, मैंने अज्ञानता के अंध विचार को बहुतायत में जड़ें जमाते देखा है।
मानवता के कल्याण, हित, वैज्ञानिक, स्वतंत्र रक्षक, शोषक और प्रदूषक, जग और जगुद्य के ज्ञान का दीपक बुझता नजर आया।
सभी इन अंध परंपराओं के नशे में चूर हैं। लोकतंत्र का गला कसा जा रहा है, इधर कोई ध्यान नहीं दे रहा।
इस देश के अंधे गुलाम त्यौहार मना रहे हैं और अपनी ही दुर्गति की गोद में अपनी ही छाती चौड़ी करके बेसुध होकर नाच रहे हैं।
भाई, तुम पढ़े-लिखे हो, ऊंचे पढ़े-लिखे हो, लेकिन रहते मूर्खों की तरह हो, तुम्हें कैसे सलाम करूं!
क्योंकि यह दुनिया मूर्खों का बाजार है, आप भी इस बाजार में गुलाम हैं!
तुम गुलाम हो!
          🙏
   वसंत कसारे.
मूल लेखक मराठी
मराठी से हिंदी अनुवाद
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🅰️🅿️
जय भीम जय भारत जय संविधान

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