मूकनायक
देश
“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”
✍🏻✍🏻
जिस प्रकार से फल का निर्माण होने के लिए फूल अपनी सारी पंखुड़ियों को अपने से अलग कर देता है, ठीक इसी प्रकार इंसान को यदि अपना लक्ष्य हासिल करना है तो फूल की पंखुड़ियों की भांति उसे अपने अंदर से टकराव, ईर्ष्या द्वेष रुपी विकारों को अपने से अलग करना ही होगा। टकराव , ईर्ष्या व द्वेष आदि विकारों को छोड़ना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है और ना ही इससे कोई हानि होती है।
इसके विपरित अगर इंसान अपने अंदर से पंखुड़ी रूपी विकारों को अलग नहीं करता है और टकराव का जवाब टकराव से देता है, ईर्ष्या व द्वेष की भावना रखता है तो ऐसे इंसान देश, समाज व परिवार में बिखराव तो करते ही हैं, परंतु इसके साथ वे अपना सम्मान भी खो देते हैं । हमारे सभी महापुरुष विरोध नहीं, बल्कि सामंजस्य के मार्ग पर चलकर ही महान कहलाए हैं।
लेखक:
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल ,प्रदेश प्रभारी मूकनायक हरियाणा

