मूकनायक/ देश
“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”
🙏🏻 आज का सुविचार 🙏🏻
15 नवंबर जयंती पर विशेष
शहीदी दिवस 9 जून 1900
आजादी की लड़ाई में दलितों, बहुजनों और आदिवासियों ने 1857 से पहले ही लड़ाई का बिगुल बजा दिया था। क्योंकि भारत के लोगों में शोषण ,साहूकारों, जमींदारों, सूदखोरों और अंग्रेजी शासन के प्रति रोष था ।जो 1857 से पहले और बाद में और आजादी मिलने तक संघर्ष जारी था। वैसे तो सब प्रांतों में क्रांतिकारी सक्रिय थे। लेकिन झारखंड में बिरसा मुंडा के नेतृत्व में स्वतंत्रता का संघर्ष अपने आप में एक ऐतिहासिक मिसाल है। आदिवासियों ने उनके नेतृत्व में रांची तथा उसके आसपास के क्षेत्र में संघर्ष करके अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे।
बिरसा मुंडाओं के लिए भगवान थे ।लोगों को जागृत करने के लिए उन्होंने बताया कि आदिवासियों के पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण अंधविश्वास और अशिक्षा को माना। बिरसा ने मुंडाओं के बीच फैली झाड़-फूंक आदि को बेकार बताना शुरू किया । वह जातिवाद और पाखंड के खिलाफ भी थे ।यह भी बताया की सफाई ना रखने पर क्या नुकसान होता है। उन्होंने शिक्षा के महत्व को भी समझाया ।यह भी बताया कि अशिक्षित इंसान ही अक्षर शोषण का शिकार होता है।
बिरसा मुंडा में लोगों को जोड़ने की एक अनूठी कला थी ।आदिवासियों के सुधार के लिए उन्होंने लोगों को समझाया की चोरी मत करो, हिंसा मत करो ,भीख मत मांगो, साधु और ओझा के चक्कर में मत पड़ो। डायन और भूत पिचास पर विश्वास मत करो ।चींटी की तरह परिश्रमी बनो। मैं तुम्हें डूबाने वाला नहीं हूं। हम आदिवासी विसर्ग से ही इस धरती के मालिक हैं ।प्राकृतिक रूप से हम सब स्वतंत्र हैं। इसलिए स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है ।जिसे हम लेकर रहेंगे।
उस दौर में लोग उन्हें धरती बाबा कहकर पुकारने लगे ।अपने सामाजिक कार्यों और उनसे जुड़ी चमत्कारी कहानियों की वजह से बिरसा मुंडा एक पैगंबर बन चुके थे। लोगों को यह विश्वास था कि उनके छूने से ही लगी चोट ठीक हो जाती है।
बिरसा मुंडा ने बली प्रथा का विरोध किया और एक नए धर्म का सर्जन किया। जिसे बिरसायत धर्म कहा जाता है ।झारखंड में बिरसा ना सिर्फ सामाजिक वह राजनीतिक चेतना के प्रतीक हैं बल्कि वह धार्मिक चेतना के भी अग्रणी माने जाते हैं। बिरसा मुंडा को बड़ा खतरा मानते हुए अंग्रेजों ने उन्हें जेल में डाल दिया और स्लो प्वाइजन दीया। इस वजह से वह 9 जून 1900 को शहीद हो गए। लेकिन उनकी सोच और उनके काम हमेशा रहेंगे। झारखंड और बिहार में लोग उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं।
जन्मदिन पर उन्हें शत-शत नमन।
लेखक: मोती राम MA
पूर्व अधिकारी
SHAHDARA

