मूकनायक
देश
*राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा*
तथागत बुद्ध के समय में कला एवं तकनीकी के क्षेत्र में विशेष योग्यता हासिल करने वालों के संघ को अरियसंघ के नाम से जाना जाता था। अरिय संघ के सदस्यों को अरियजन कहा जाता था। एक इतिहास में कृषि योग्य भूमि को इला इरा इड़ा अरा कहा गया है और कृषक यानी खेती करके अन्न उपजाने वाले अथवा उपजाऊ कृषि भूमि पर पशु पालन करने वाले को भी अरिया या आर्या कहा गया है । कालांतर मे अरिय जन शब्द ब्राह्मणी मनुवादी खड्यंत्र का शिकार होकर पहले अरि को दुश्मन का पर्याय बनाया गया । ब्राम्हण अपने को श्रेष्ठ साबित करने के लिए भी आर्य शब्द अपने लिये प्रयोग करने लगे । जो लोग बाहरी देशों से पशुपालन के जरिये भारत भूमि सिन्धु घाटी में प्रवेश करके यहीं पर बस गये । छल फरेब के द्वारा यहाँ के चरागाहों के साथ साथ यहाँ के छोटे छोटे राज्यों को लड़ झगड़ कर हथियाना शुरू कर दिया । शक्ति बढ़ाकर बड़े बड़े राज्यों को भी धोखा देकर परास्त कर दिया ।फिर मनमानी करने लगे ।
महारी (महान अरिया) शब्द को महारि महान + अरि और महार बना दिया गया यानी महान दुश्मन बताकर अपने समाज और नगरीय सभ्यता से बहिष्कार कर अछूत घोषित कर दिया ।इसी महार को उत्तर भारतीय राज्यों में अछूत चमार व अन्य अछूत जातियों में बदल दिया गया है ।बाबा साहब डा. भीम राव अंबेडकर ने इन बहिष्कृत अछूत जातियों को संवैधानिक रूप में एससी (अनुसूचित जाति) जनगणना की अनुसूची में दर्ज नाम से संबोधित किया है ।
लेकिन गान्धी जैसे नेताओं ने बहिष्कृत अछूत जाति समझे जाने वाले समाज को हीनता सूचक शब्द हरिजन में बदल दिया। जबकि मनुवादी व्यवस्था में एक प्रकार का हरिजन देवदासी पुत्रों को भी कहा गया है । ये लोग हरि को ईश्वर मानते हैं और हरिजन को ईश्वर की संतान । जबकि हरिजन शब्द मन्दिरों में देवदासियों की अवैध सन्तानों यानी पंडा पुजारियों के देवदासियों के साथ किये गये हवस दुराचार व्यभिचार से उत्पन्न संतानों को जिनके बॉयलौजिकल बाप पंडा पुजारी होते हैं उन्हें ही कहना सही है ।
गान्धी जैसे नेताओं ने तो महान विरासत के धनी अन्य एससी के साथ महार चमार व अन्य अछूत समझी जाने वाली जातियों आदि को अपमानित करने के लिए ही यह शब्द दिया था | बाबा साहब ने भी इस शब्द का विरोध किया था । एक सार्वजनिक सभा में सवर्ण नेताओं द्वारा एससी समुदाय को बार बार हरिजन शब्द से संबोधित किया जा रहा था । जिसमें मायावती जी भी मौजूद थीं यहीं पर बहन मायावती जी ने सार्वजनिक तौर पर ही कहा था कि यदि अछूत एससी के लोग हरिजन हैं तो इन्हें हरिजन कहने वाले क्या शैतान की औलाद हैं ? इस पर बड़ा बवाल मच गया था ।लेकिन बहनजी कभी किसी से डरने वाली नहीं रही हैं ।
अब आते हैं असल हरिजन शब्द पर- असल में हरिजन शब्द में जो हरि है वह अरिय शब्द का बिगड़ा हुआ रूप है। अरियजन पाली भाषा का शब्द है ।अरियजन वे लोग थे जो कला एवं तकनीकी के क्षेत्र में विशेष योग्यता धारण करते थे। ये अरिय जन जमीनी सच्चाई यानी सांसारिक प्राकृतिक नियमों की सत्यता को भली भाँति जानने वाले हुआ करते थे । राग द्वेष ईर्ष्या लोभ मोह वासना से दूर रहकर, प्रज्ञा शील करुणा युक्त प्राणी जगत को सुख देने वाले होते थे ।ऐतिहासिक तौर पर ये राजा महाराजा सम्राटों की गौरवशाली परंपरा के वंशज रहे हैं । इन्होंने अपने राज्यों के पतन पर अनेक प्रकार के कष्ट सहे मगर गुलामी स्वीकार नहीं की । सत्य मार्ग का त्याग नहीं किया आर्य सत्य यहीं से शुरु होता है ।
बुद्ध वंदना ‐ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुधस्स में प्रयुक्त अरहत शब्द से ही अरिय शब्द बना है पाली भाषा के अरिय शब्द से ही संस्कृत का अर्हता और अंग्रेजी का एलिजिबल शब्द बना है। जिसका अर्थ है – सुयोग्य या पात्रता ।
अरियजन वास्तविकता में सिन्धु घाटी की सभ्यता की महान विरासत है ।सिन्धु सभ्यता में मूलतः सात बड़ी नदियों का उपजाऊ कृषि क्षेत्र है । सतलज ,रावी, झेलम, चिनाव, सिन्धु ,गंगा, यमुना ईरानी मूल के लोगों को “स” का उच्चारण नहीं करना आता था । स की जगह ये लोग ह का उच्चारण करते थे ।अतः ये लोग इस सप्त सिन्धु सभ्यता को हफ्त हिन्दू सभ्यता कहते थे ।इसी से हिन्दू शब्द का उदय हुआ कहा जा सकता है ।लेकिन यह धार्मिक शब्द न होकर सभ्यता सूचक शब्द है वहीं ग्रीस व यूरोपियन लोग “ह” की जगह “इ” का उच्चारण करते थे ।उन्होंने इस सभ्यता को इण्डस वैली सभ्यता कहा ।
कुल मिलाकर हमारी सभ्यता बहुत महान है । श्रेष्ठ और आर्य है सात बड़ी नदियों से सिंचित यह सभ्यता शूरवीर द्रविण और “नाग”- हाथी का पर्याय यानी हाथी जैसी विशालता का प्रतीक नागवंशी है ।
समस्त एससी-एसटी ओबीसी व धर्म परिवर्तित मायनॉरिटी को अपना गौरव हासिल करने का प्रयास करना चाहिए ।इन्हें हरिजन कहने वालों को मुँहतोड़ जवाब देना चाहिए । सुप्रीम कोर्ट के अनुसार एससी को हरिजन कहना कानूनन अपराध है । संवैधानिक तौर पर भी इस शब्द के प्रयोग को प्रतिबंधित किया गया है | इन पर एफआईआर दर्ज करायी जा सकती है ।
एससी-एसटी ओबीसी अरियजन आर्य (श्रेष्ठ) हैं हरि से या हरिजन से इनका कोई लेना देना नहीं है ।
कुछ राजनीति से प्रेरित मनुवादी लोग जानबूझकर इन्हें अपमानित करने के लिये ही हरिजन शब्द से संबोधित करते रहते हैं जो संविधान सुप्रीम कोर्ट का उल्लंघन है ।
इन्हें एक बार ही नहीं हर एक बार पलट कर जबाब देने की जरूरत है यदि एससी के लोग हरिजन ईश्वर की संतान हैं तो कहने वाले क्या शैतान की संतान हैं ? वैसे ही जैसे बहन मायावती जी ने जबाब दिया था वह चार बार उ.प्र. की मुख्यमंत्री बनी बौद्ध भिक्षु भन्ते सुमित रत्न ने तो अनुसूचित जाति के लोगों को हरिजन कहने वालों पर एफआईआर कराने तक का समर्थन किया है ।
फिलहाल हमें अरियजन आर्य अरि और हरिजन का शाब्दिक अर्थ व भावार्थ ठीक से समझना ही होगा ।
लेखक:
देवी दयाल दिनकर (मैनेजर)
बाबा खयालीदास के पीछे
चमन गंज फफूंद
जिला- औरैया ( उप्र ) 206247
9415771347

