Thursday, February 26, 2026
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अत्त दीपों भव

मूकनायक /देश

“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”

भगवान बुद्ध ने भिक्खुओं को संबोधित करते हुए कहा- ” वे स्वयं को अपना द्वीप, अपनी शरण बना कर और किसी अन्य का शरणागत न बन, और ऐसे ही धम्म को द्वीप बनाकर,शरण बनाकर और किसी अन्य का शरणागत न बनकर विहार करें।”

“Atta”- अत्त means self- स्वयं ।

तथागत ने निग्रोध जातक को कहते हुए कहा-

भिक्खुओं! दूसरे को अपना स्वामी बनाने पर मार्ग की प्राप्ति नहीं हो सकती है।
व्यक्ति अपने को अच्छी तरह से दमन करने से वह दुर्लभ स्वामित्व (निर्वाण) को प्राप्त करता है।

गाथा में बुद्ध ने कहा-

“अत्ता हि अत्तनो नाथो,
को हि नाथो परो सिया।
अत्तनाहि सुदन्तेन,
नाथं लभति दुल्लभं।”

नंगलकुल थेर भिक्खुओं को बताया- “मैं अब मुक्त हूँ।” इसे सुनकर भिक्खुओं ने भगवान से कहा- ” भन्ते ! यह नंगलकुल झूठ बोलता है,अर्हत्व प्राप्ति की घोषणा करता है।” तब भगवान ने कहा-

“अत्ता हि अत्तनो नाथो,
अत्ता हि अत्तनो गति।”

मनुष्य अपना स्वामि अपने आप है। स्वयं ही अपनी गति है।

तथागत ने अपने आपको भी स्वामी नहीं कहा है। प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्र बनाया है। औरों का स्वामित्व बुद्ध ने नकारा है। मनुष्य अपने कर्मों के अधिन है। कोई अदृश्य शक्ति जगत को संचालित करती है,यह अवधारणा को झूठ बताया है।
मनुष्य अपने कर्मों से महान बन सकते है या दुर्गति को प्राप्त करते है।

नमो बुद्धाय🙏🙏🙏
15.11.2024

लेखक: रवि शेखर बौद्ध, मेरठ मंडल प्रभारी

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