मूकनायक
देश
“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”
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मन का आनन्द ही अच्छी औषधि है। अपने जीवन के कुम्हार हम खुद हैं । कोई भी हमें बना और बिगाड़ नहीं सकता। कहते हैं कि मुस्कुरा कर देखने में और देखकर मुस्कुराने में बड़ा फर्क है, कभी नतीजे बदल जाते हैं और कभी कभी रिश्ते भी।
इसलिए जहां भावना की कदर होती है, वहां मन अपने आप झुक जाता है, भले ही उस रिश्ते का कोई नाम न हो । संतों की वाणी कहती हैं कि प्रकृति के पास तो देने के हजारों तरीके है, मांगने वाले तू देख तुझ में कितने गुण है ।
लेखक:
बिरदी चंद गोठवाल, स्टेट हेड
हरियाणा

