Thursday, February 26, 2026
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18 वर्ष के प्रत्येक नागरिक को अनुच्छेद 326 के अंतर्गत मत अधिकार करने का प्राप्त है, उसको भारत सरकार और राज्य सरकार से रोजगार भत्ता प्राप्त करने का अधिकारी है

मूकनायक

भारत

ओमप्रकाश वर्मा

यदि भारत के प्रत्येक नागरिक की जो कि वयस्क है उसकी एक महीने की तनख्वाह कम से कम 50000 अधिकतम 150000 कर दी जाए तो क्या भारत में भुखमरी गरीबी बेकारी लाचारी बेरोजगारी रहेगी शायद बिल्कुल नहीं।

क्योंकि संसद में बैठने वाले सांसदों का दायित्व है कि वह भारत का संविधान का भाग 4 राज्य के नीति निर्देशक तत्व के अंतर्गत अनुच्छेद 38 के खंड 2 का पालन करना और करवाना सुनिश्चित करें क्योंकि इस अनुच्छेद प्रावधान किया गया है कि राज्य अर्थात भारत की सरकार और संसद और राज्यों की सरकारें और विधान मंडल भारत राज्य क्षेत्र के अधीन और भारत सरकार के अधीन समस्त स्थानीय और अन्य प्राधिकारी हैं, का दायित्व है कि वह अनुच्छेद 38 के खंड 2 का पालन करना और करवाना सुनिश्चित करेंगे। और जब भारत सरकार ऐसा कदम उठाएगी तो प्रत्येक भारतीय नागरिक को एक निश्चित आमदनी मिल जाएगी जिससे वह ना गरीब रहेगा ना ही उसे भीख मांगने या चोरी करने की आवश्यकता पड़ेगी और ना ही वह किसी का धन चुरायेगा क्योंकि उसके पास बेरोजगारी नहीं रहेगी भारत सरकार और राज्य सरकार का दायित्व है कि प्रत्येक नागरिक को रोजगार उपलब्ध करना सुनिश्चित करें और यदि रोजगार उपलब्ध नहीं है तो कम से कम ₹50000 प्रति माह भत्ता उपलब्ध कराए।

यह भारत सरकार और राज्य सरकार के प्राथमिक कार्यों में से प्रथम कर्तव्य है जिसका पालन करना और करवाना सुनिश्चित हो।

18 वर्ष से ऊपर का प्रत्येक नागरिक जिसे अनुच्छेद 326 के अंतर्गत मत अधिकार का उपयोग करने का अधिकार प्राप्त है वह भारत सरकार और राज्य सरकार से रोजगार और भत्ता प्राप्त करने का अधिकारी है। क्योंकि प्रत्येक नागरिक भारत सरकार अथवा राज्य सरकार को प्रत्येक खाद्य वस्तु या उपयोग में आने वाली वस्तु पर टैक्स देता है इसलिए भारत का प्रत्येक मतदाता भारत का प्रत्येक करदाता भारत सरकार से सवाल करने का और राज्य सरकार से सवाल करने का पूर्ण अधिकार रखता है क्योंकि लोकतंत्र में सरकार जनता के द्वारा चयनित की जाती है जनता की सरकार जनता के लिए जनता के द्वारा ही घोषित होगी और होती है लोकतंत्र में जनता मालिक है और नौकरशाह केवल नौकर भारत की संचित निधि या राज्यों की संचित निधि से वेतन प्राप्त करने वाला प्रत्येक अधिकारी कर्मचारी सांसद विधायक भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 2 के खंड 28 के अंतर्गत लोक सेवक की परिधि के अंतर्गत आता है इसलिए प्रत्येक संवैधानिक पद पर बैठे हुए नागरिक का कर्तव्य है कि वह भारत का संविधान का पालन करना और करवाना सुनिश्चित करें अन्यथा अपने पद से त्यागपत्र दे इसलिए कि वह योग्य नहीं है।

भारत सरकार का और राज्य सरकारों का यह दायित्व है कि वह भारत का संविधान के भाग 3 मूल अधिकार के अंतर्गत अनुच्छेद 14 अनुच्छेद 15 अनुच्छेद 16 और अनुच्छेद 17 का पालन करना और करवाना सुनिश्चित करें क्योंकि भारत में जाति धर्म लिंग जन्म स्थान वंश आदि के आधार पर भेदभाव समाज में व्याप्त है जिसे खत्म किया जाना अनिवार्य और आवश्यक है जिसके बिना खत्म हुए भारतीय समाज में समता, स्वतंत्रता बंधुत्व और न्याय की भावना जन्म नहीं ले सकती इसलिए प्रत्येक भारतीय नागरिक को भारत का संविधान का अध्ययन करना अनिवार्य है और उसका पालन करना अनिवार्य है कोई भी व्यक्ति भारत का संविधान का उल्लंघन और राष्ट्रध्वज का अपमान और राष्ट्रगान का अपमान नहीं कर सकता क्योंकि राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1955 नागरिक सुरक्षा अधिकार अधिनियम 1955 के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है जिसमें 3 साल तक की सजा नियत है। इसलिए प्रत्येक भारतीय नागरिक का दायित्व और कर्तव्य है कि वह भारत का संविधान का पालन करें और उसके आदर्श संस्थाओं राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें क्योंकि भारत का संविधान भारत का सर्वाधिक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दस्तावेज है जिसकी सुरक्षा और संरक्षण प्रत्येक भारतीय की नैतिक जिम्मेदारी है संविधान है तो अधिकार है अधिकार है तो जीवन है जीवन है तो संघर्ष है अगर संविधान नहीं तो जीवन शून्य है।

संविधान ही जीवन है। इसे अपनाएं और अमल में लाएं खुद भी पढ़ें और दूसरों को पढ़ने के लिए प्रेरित करें।
*संविधान शरणम गच्छामि*
आओ सविधान की शरण में जाएं और अपने हक अधिकार और कर्तव्य का भारत बनाएं।

घर-घर राष्ट्रध्वज
हर घर राष्ट्र ध्वज
जय संविधान जय लोकतंत्र

लेखक: रवि शेखर बौद्ध

राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ बी आर अंबेडकर जनकल्याण विकास जागरण मंच

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