Thursday, February 26, 2026
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सांचौर में किशोर संस्कार एवं कैरियर गाइडेंस शिविर का सफल समापन

मूकनायक/राजस्थान/जिला ब्यूरो चीफ सांचौर/रिडमल राम परमार की रिपोर्ट

सांचौर = अम्बेडकर उद्यान बी.ढाणी सांचौर में दिनांक 25 अक्टूबर से 29 अक्टूबर 2024 तक भंते डॉ. सिद्धार्थ वर्धन के पावन सानिध्य में आयोजित पांच दिवसीय किशोर संस्कार एवं कैरियर गाइडेंस शिविर का आज सभी समाजबंधुओं की उपस्थिति में सफल समापन हुआ। यह शिविर समाज के युवा विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया था, जिसमें उन्हें जीवन में आगे बढ़ने, आत्म-विश्वास बढ़ाने और विभिन्न करियर विकल्पों के बारे में मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

इस शिविर का मुख्य उद्देश्य किशोरों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सक्षम बनाना था। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर चर्चाएँ और कार्यशालाएँ आयोजित की गईं, जिनमें वक्ताओं ने विद्यार्थियों को सकारात्मकता और नेतृत्व कौशल के विकास के लिए प्रेरित किया। शिविर में प्रतिभागियों को न केवल शिक्षा की महत्ता के बारे में बताया गया, बल्कि उन्हें व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक तकनीकों से भी अवगत कराया गया।

मुख्य वक्ता शिव बोधि सूरतगढ़ ने अपने प्रेरणादायक भाषण में बाबा साहब अम्बेडकर के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे उन्होंने शिक्षा और संघर्ष के माध्यम से अपने समाज के लिए एक नया रास्ता खोला। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि भाषा, संस्कृति, और जीवन में सफलता के विभिन्न उदाहरणों से वे अपनी प्रेरणा ले सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ज्ञान ही सबसे बड़ा शक्ति है और इससे ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

समाजसेवी रमेश कुमार बोस (अगार) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हर व्यक्ति में आगे बढ़ने की हिम्मत होनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को यह सीखने के लिए प्रेरित किया कि सही और गलत का मूल्यांकन करना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “यदि हम अपने मूल्यों को बनाए रखते हैं, तो हम जीवन में सही निर्णय ले सकेंगे।”

पोपटलाल धोरावत, एसीबीईओ ने धन और संस्कार के संबंध पर चर्चा करते हुए कहा कि केवल धन होना सब कुछ नहीं है। उन्होंने कहा, “धन का सही उपयोग तभी संभव है जब व्यक्ति में संस्कार हों। संस्कार के बिना धन का कोई उपयोग नहीं है।” उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया कि जीवन में नैतिकता और जिम्मेदारी का क्या महत्व है।

वेरसीराम पारेंगी (नायब तहसीलदार) ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा व्यक्ति को शिखर तक पहुँचाने में सहायक होती है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न प्रोत्साहन और छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए, जिससे गरीब परिवार के बच्चे भी आगे बढ़ सकें। उन्होंने छात्रवृत्ति योजनाओं की विस्तार पूर्वक जानकारी साझा की, ताकि विद्यार्थियों को उनके अधिकारों और अवसरों के बारे में जानकारी हो सके।

मेघवाल संघर्ष समिति के अध्यक्ष नरपतसिंह केरिया ने इस प्रकार के कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक विचारों का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से युवा पीढ़ी में जागरूकता बढ़ती है, और समाज के विकास के लिए यह आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन समय-समय पर होना चाहिए, ताकि समाज के सभी वर्गों को लाभ मिल सके।

आयोजकों ने इस शिविर को सफल बनाने में सभी समाजबंधुओं के सहयोग के लिए दिल से धन्यवाद किया। आयोजकों ने आशा जताई कि भविष्य में भी समाजबंधुओं का सहयोग बना रहेगा, ताकि समय-समय पर ऐसे आयोजन होते रहें। उन्होंने यह भी कहा कि यह शिविर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक सिद्ध होगा और उन्हें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा।

इस शिविर के सफल समापन ने समाज में शिक्षा और संस्कार के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाया है, और यह युवा पीढ़ी के विकास के लिए प्रेरणादायक सिद्ध होगा। इस प्रकार के आयोजनों से समाज में एक नई ऊर्जा का संचार होता है, जिससे युवा आगे बढ़ते हैं और अपने सपनों को साकार कर पाते हैं।उनके समर्थन और योगदान ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस कार्यक्रम में मंच संचालन प्रकाश चंद मालवाड़ा ने किया, जिन्होंने कार्यक्रम को व्यवस्थित और सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर व्याख्याता पोपटलाल धोरावत (आमली), मेवाराम बाजक, नेमीचंद खोरवाल, रूपाराम कांटोल, केसाराम मनुवेर, प्रेमाराम गुन्दाऊ, रिडमलराम गुन्दाऊ, जयकृष्ण मेघवंशी (मीरपुरा), मुलाराम वाघेला, शांतिलाल नागवंशी, हरलाल पारेंगी (जाखल), संजय कालमा सहित कई भामाशाह और समाजबंधु मौजूद रहे।

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