मूकनायक/मध्य प्रदेश /राजू कुमार
विश्व को शान्ति का संदेश देने वाले महाकारुणिक सम्यक सम्बुद्ध के सद्धम्म को सम्राट अशोक महान ने अखंड भारत और विश्व के अन्य महाद्वीपों तक प्रचारित किया। बुद्ध के धम्म को जिन देशों ने स्वीकारा, वो आज विकसित और विश्व के सशक्त राष्ट्र के रूप जाने जाते हैं।
धम्म की इसी यात्रा को आगे ले जाने और विश्व पटल पर बुद्ध की गौरवशाली विरासत के अगुआ के रूप में भारत देश की पहचान बनाने के लिए ढाई हजार वर्षों बाद बोधिसत्व बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ने प्रण और प्राण से संकल्प लिया।
बाबासाहेब ने संकल्प लिया भारत को बौद्धमय राष्ट्र के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने का, प्रबुद्ध भारत के लोगों को प्रबुद्ध नागरिक बनाने के साथ समता, समानता, बंधुत्व और न्याय की अवधारणा को व्यापक रूप में प्रतिस्थापित करने का।
उक्त विचार डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर मेमोरियल सोसायटी भीम जन्मभूमि स्मारक महू के अध्यक्ष भंते प्रज्ञाशीलजी ने कुशवाह नगर में स्थानीय बुद्ध पर आयोजित वर्षावास समापन कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कही।
इसी अवसर पर सुदेश बागड़े मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। आपने बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा रचित बुद्ध और इनके धम्म ग्रंथ के समापन अवसर पर सभी को बधाई प्रेषित कर बाबासाहेब के शिक्षा के मार्ग पर सर्वसमाज को आरूढ़ और प्रतिबद्ध रहने के लिए प्रेरणा स्वरूप उद्बोधन दिया।
इस अवसर पर सम्यक बुद्ध विहार के अध्यक्ष उत्तमराव पाटिल, गुलाबराव नीरपुर, निर्मल अतुलकर, यादवराव अंबुलकर, नंदलाल गुजरे, मुकेश आठनेरे, मालती ताई झरबड़े, संगीता नीरपुर, गीता अतुलकर, रेखा अंबुलकर, संगीता बागड़े, किरण आठनेरे, सुशीला पाटिल, मुदिता अतुलकर, लीला चंदेलकर, कविता गुजरे, अनुसया अतुलकर सहित बड़ी संख्या में बालक बालिकाएं उपस्थित रही।
बौद्धाचार्य प्रकाश मुक्तिकर जी ने सभी को त्रिशरण पंचशील गृहण कराया।
कार्यक्रम में सभी ने मैत्री भोज भी गृहण किया।

