Thursday, February 26, 2026
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प्रयागराज में 27 अक्टूबर को विश्व बौद्ध सम्मेलन की तैयारी को लेकर प्रेस वार्ता: भंते सुमित रतन

मूकनायक
उत्तर प्रदेश/प्रयागराज
राम प्रसाद भारती

आगामी 27 अक्टूबर को विश्व बौद्ध सम्मेलन प्रयागराज की पावन धरती पर अलोपी बाग पटेल संस्थान में आयोजित किया जाएगा।वहां पर आने वाले लोगों के लिए खाने की व्यवस्थित प्रबंध किया गया है ,और रहने के लिए बहुत बड़ा पंडाल लगाया जा रहा है ।देश और कई विदेश से लोग इस बौद्ध सम्मेलन में शामिल होंगे ।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के तौर पर बौद्ध धर्म के उद्धारक डॉ अंबेडकर के पोते डॉ यशवंत राव अंबेडकर शामिल होंगे।

*विश्व बौद्ध सम्मेलन करने का उद्देश्य*

तथागत बुद्ध के शिक्षाएं घर-घर जाएं वर्तमान के दौर में ईर्ष्य, द्वेष ,नफरत से आदमी जल रहा है और जातिवाद चरम पर है कि जो जातियां जातियों में ऊंचे पर हैं स्वाभिमान करें तो ठीक है लेकिन जातियों में जो पांचवें पायदान पर अछूत हैं जो शूद्र कहलाए गए उनमें भी जाति का गौरव आ रहा है ऐसा होना भगवान बुद्ध के विचारों की हत्या , बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के विचारों की हत्या है जब तक यह बहुजन समाज से बौद्ध नहीं बनेगा बहुजन समाज नहीं बनाएगा तब तक यह भारत का हुक्मरान नहीं हो सकता यह समझने के लिए बौद्ध सम्मेलन किया जा रहा है।
यह आठवां विश्व बौद्ध सम्मेलन है हमारा लक्ष्य है 100 बड़े-बड़े बौद्ध सम्मेलन करने का इसके बाद अगला बौद्ध सम्मेलन झांसी की पावन धरती 23 फरवरी में आयोजित किया जाएगा। इस बौद्ध सम्मेलन में उसमें भूटान के प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे।

सुमित रतन भंते जी ने जानकारी देते हुए बताया कि
इलाहाबाद कुंभ का वास्तविक नाम बौद्ध समागम था।

वर्तमान में इलाहाबाद का जो मेला लगता है इसे बौद्ध सम्राट राजा हर्षवर्धन ने लगवाया था अपनी सगी बहन बौद्ध भिखुड़ी राजकुमारी के कहने पर इसलिए वह पूरी दुनिया के बौद्धों को बुलाया गया था उस समय पूरा 90 दिनों तक चला था पूरी दुनिया के लोग इस मेले में शामिल हुए थे इसका नाम पहले बहुत समागम था और जब बौद्ध नहीं रहे तो इसका नाम कुंभ हो गया। 1250 साल बौद्ध राजाओं ने इस देश पर शासन किया है इस दौरान सम्राट हर्षवर्धन द्वारा यह कुंभ लगाया गया उनकी स्मृति में बौद्ध सम्मेलन होने जा रहा है क्षेत्र के लोगों से निवेदन करूंगा की ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोग आए और फिर एक भारत बाबा के सपनों का भारत सम्राट अशोक और बुद्ध के सपनों का भारत बनाना है।

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