मूकनायक
देश
(राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा)
धार्मिकता त्याग प्रभु,
नैतिकता अपनाओ।
नैतिक चरित्र हैं उत्तम,
धार्मिक प्रपंच छोड़ो।
नैतिक गुण श्रेष्ठ धम्म,
धार्मिक स्वांग न धरो।
धार्मिक मानसिक रोग,
लील जा इंसानियत को।
माटी पाषाण पूजवा के,
मरवाता है इंसानों को।
धर्म का संग मत करना,
धम्म अंत: करण में धरो।
धर्म की संकुचितता को,
प्रभु समझ कर त्यागो।
धम्म की सार्वभौमिकता,
आचरण आचरित करो।
स्वार्थ हेतु धर्म बदलता,
धम्म मौलिकता तुम जानों।
धर्म संप्रदाय स्वरूप होता,
भिन्न मतों में बंटा है देखो।
धम्म तत्व भिन्न देश काल,
अपनी मौलिकता में रहता।
धम्म तत्व सनातन प्राकृत्य,
मानव हस्तक्षेप नही मानो।
प्रभु की कलम ✍️ से…..!
स्व रचित मौलिक रचना- प्रभुलाल मेहर ( विनयपाल बौद्ध)
गुराड़िया झाला, तहसील गंगधार, जिला झालावाड़ राज.

