Thursday, February 26, 2026
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दलित अधिकार केंद्र जयपुर के द्वारा, दलित भूमि अधिकारों पर एक दिवसीय गोलमेज बैठक का सफल आयोजन

मूकनायक/ राजस्थान/जयपुर/ राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा

दलित अधिकार केंद्र के द्वारा दलित अधिकार केंद्र कार्यालय, जयपुर में दलित अधिकार केंद्र, दलित मानवाधिकार केंद्र समिति व दलित महिला मंच के संयुक्त तत्वाधान में दलित भूमि अधिकारों पर गोलमेज बैठक का सफल आयोजन दिनांक 17 अक्टूबर 2024 को किया गया। जिसमें दौसा, भरतपुर, अलवर, अजमेर, करौली, गंगापुर सिटी तथा जयपुर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। शिविर के प्रारंभ में बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया तथा बुद्ध वंदना से शिविर का शुभारंभ किया गया। शिविर की शुरुआत करते हुए दलित अधिकार केंद्र के मुख्य कार्यकारी हेमंत कुमार मीमरोट द्वारा प्रशिक्षण के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया तथा दलित अधिकार केंद्र के बारे में बताया गया एवं दलितों की भूमि की स्थिति के बारे में अवगत कराया गया।
मुख्य वक्ता के रूप में पधारे हुए समग्र सेवा संस्थान जयपुर के अध्यक्ष सवाई सिंह के द्वारा दलितों की भूमि की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझाते हुए बताया कि पहले दलितों के पास किस तरह की भूमि हुआ करती थी और आज उसकी स्थिति क्या है किस तरह से दलितों की भूमि को दबंग जातियों के द्वारा हड़पने की नीयत से अनैतिक तरीकों से कब्जा करने की स्थिति बनाई जाती है। हमें दलितों के भूमि अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं होती है जिसके कारण हमारे लोगों की भूमि उनके पास से चली जाती है और वे उनके लिए लड़ाई नहीं लड़ पाते हैं। उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि हम सभी को अपने अधिकारों के बारे में पता होना चाहिए। कई प्रकार के केसों के उदाहरणों के द्वारा उन्होंने कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया कि किस तरह से हम अपनी भूमि को बचा सकते हैं और अपने आप को भी सुरक्षित रख सकते हैं। इस प्रकार उन्होंने अपने अनुभवों को बताते हुए सभी को अपनी भूमि को सुरक्षित रखने के लिए और संगठित रहने के लिए प्रेरित किया।
राजस्थान की पहली दलित महिला जज श्रीमती सुशीला नागर के द्वारा भी विभिन्न प्रकार के दलित भूमि के लिए बने भूमि अधिकारों के बारे में बताया गया और अपने अधिकारों के लिए मजबूती से लड़ने के लिए प्रेरित किया गया।
दलित अधिकार केंद्र के निदेशक एडवोकेट सतीश कुमार के द्वारा विभिन्न प्रकार के कानूनों के बारे में जानकारी दी गई और बताया गया कि हमारे दलितों की भूमि से संबंधित प्रकरणों में किस प्रकार से कानून की जानकारी के अभाव में कमियां रह जाती हैं और हमारे लोगों को उसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। कैसे प्रशासन का सपोर्ट हमारे लोगों को नहीं मिल पाता है और विभिन्न प्रकार के कानूनों के होने के बावजूद भी न्याय मिलने में बहुत अधिक समय लग जाता है जिसके कारण लोगों का हौसला टूट जाता है और आरोपियों को उसका लाभ मिल जाता है। धारा 42 बी के बारे में भी बताया। और बताया कि हमें हमारे केशों में किसी भी कमी को ना छोड़कर के और अधिकारों को जान करके मजबूती के साथ लड़ाई लड़नी होगी, दलित अधिकार केंद्र सभी कार्यकर्ताओं के साथ है।
दलित अधिकार केंद्र के सह निदेशक एडवोकेट चंदालाल बैरवा के द्वारा दलितों की भूमि से संबंधित दस्तावेजीकरण और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बारे में विस्तार से समझाया और राजस्व से संबंधित विभिन्न प्रकार की महत्वपूर्ण पत्रावली के बारे में भी समझाया। 183 बी और सी के बारे में बताया और सरकार के द्वारा चलाई गई विभिन्न प्रकार की योजनाओं से अवगत कराया।
सामाजिक कार्यकर्ता व सेवा निवृत व्याख्याता गिरधारी लाल ने भी सभी को अपनी जमीन को सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए सभी से अपील की और सभी से संकल्प लिया कि वह सभी अपनी जमीनों की सुरक्षा करेंगे।
पीड़ित राजेंद्र कुमार गांव पावटा, जिला दौसा ने भी अपनी बात रखी और बताया कि किस तरह से आरोपियों के द्वारा उनकी जमीन को हड़पने के लिए उनके पूरे परिवार पर छह बार से अधिक हमला किया जा चुका है उनके ऊपर राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक रूप से समझौते के लिए दबाव बनाया जा रहा है। बार-बार उनकी जान पर हमला किया जा रहा है। एससी/ एसटी कोर्ट के द्वारा उनको सुरक्षा दिए जाने के बावजूद भी प्रशासन उनको सुरक्षा नहीं दे रहा है और प्रशासन स्वयं उनके ऊपर दबाव बना रहा है।
करौली से आए हुए पीड़ित नरेंद्र कुमार के द्वारा भी अपनी जमीन के प्रकरण को लेकर अपनी बात रखी गई कि किस प्रकार से उनकी जमीन को दबंगों द्वारा हड़पने की कोशिश की जा रही है और लंबी लड़ाई करने के बावजूद भी अभी भी वह संघर्ष कर रहे हैं।
मासलपुर जिला करौली से आए हुए एक अन्य पीड़ित बुजुर्ग ने कहा कि उनकी जमीन के लिए वह 54 साल से लड़ाई लड़ रहे हैं उनके चार भाइयों में से तीन का स्वर्गवास हो चुका है वह अकेले बचे हैं, परिवार के सभी लोगों ने उनका साथ छोड़ दिया है फिर भी वह अभी तक संघर्ष कर रहे हैं।
दलित महिला मंच कि राज्य समन्वयक कश्मीरा सिंह ने बताया कि किस प्रकार से दलितों के ऊपर कई तरह से अत्याचार किए जा रहे हैं। दलितों की भूमि को हड़पने की नीयत से दबंग जातियों के द्वारा अनेक प्रकार से षड्यंत्र किए जाते हैं और दलितों को ही मोहरा बनाकर के दलितों को आपस में लड़ाया जाता है और उनमें आपसी दुश्मनी करवाई जाती है। इस प्रकार से अपना काम निकलवाया जाता है राजस्थान में महिलाओं के साथ अनेक प्रकार के अत्याचार हो रहे हैं विशेष रूप से एकल महिला या कोई वृद्ध महिला जिसके पास जमीन है और कोई परिवार में कोई पुरुष नहीं है उनकी जमीन को हड़पने की नीयत से महिला पर अनेक प्रकार के आरोप लगाए जाते हैं और उसको समाज में अनेक प्रकार के आरोप लगा करके समाज को भ्रमित किया जाता है। उन्होंने पश्चिमी राजस्थान का एक उदाहरण बताते हुए समझाया कि किस प्रकार से एक वृद्ध महिला के परिवार में से सभी पुरुषों के स्वर्गवास हो जाने के कारण एक अकेली महिला के रह जाने के कारण उसे डायन बता करके उसकी जमीन को हड़पने की नीयत से कई वर्षों से उसे घर में कैद करके रखा हुआ है। इस तरह से अकेली महिला को परेशान करके एवं उसके ऊपर अलग-अलग तरह के आक्षेप लगा करके उसकी जमीन को हड़पने का प्रयास किया जाता है। महिलाओं के लिए लड़ाई लड़ना बहुत ही चुनौतीपूर्ण होता है। महिलाएं मजबूती के साथ लंबी लड़ाई लड़ने के लिए अभी उस स्तर पर सक्षम नहीं हुई है। अतः हमें महिलाओं को भी सशक्त और सक्षम बनाने की जरूरत है महिलाओं को शिक्षित और जागरूक करके उनके हक अधिकारों को समझाना भी हमारा दायित्व है हमें महिलाओं को साथ लेकर चलना होगा तभी हम अपना और समाज का विकास कर पाएंगे।
दलित अधिकार केंद्र की राज्य समन्वयक खुशबू सोलंकी के द्वारा सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
इस प्रकार से एक दिवसीय गोलमेज बैठक का सफल आयोजन किया गया जिसमें राजस्थान से लगभग 45 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

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