मूकनायक
राजस्थान /जयपुर
ओमप्रकाश वर्मा
दलित अधिकार केंद्र के द्वारा दलित अधिकार केंद्र कार्यालय जयपुर में दलित अधिकार केंद्र जयपुर, डी.एम.के.एस.,दलित महिला मंच एवं दलितजन सामाजिक न्याय समिति के संयुक्त तत्वाधान में बाल अधिकार तथा मानवाधिकारों पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन दिनांक 5.10.2024 को किया गया जिसमें दौसा, भरतपुर, अलवर, अजमेर, करौली, गंगापुर सिटी तथा जयपुर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
दलित महिला मंच की राज्य समन्वयक कश्मीरा सिंह के द्वारा मंच का संचालन किया गया। शिविर के प्रारंभ में बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया तथा बुद्ध वंदना से शिविर का शुभारंभ किया गया। शिविर की शुरुआत करते हुए दलित अधिकार केंद्र के मुख्य कार्यकारी एडवोकेट हेमंत कुमार मीमरोट द्वारा प्रशिक्षण के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया तथा दलित अधिकार केंद्र के बारे में विस्तार से बताया और प्रदेश में दलित बालकों की वर्तमान स्थिति से सभी को अवगत कराया।
दलित अधिकार केंद्र के सह निदेशक एडवोकेट चंदालाल बैरवा के द्वारा मानवाधिकारों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि मानवाधिकार क्या होते हैं , उन्हें प्राप्त करना सभी के लिए अनिवार्य है एवम उनकी रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है। मानवाधिकारों के हनन होने पर किस प्रकार से उन्हें प्राप्त करने के लिए हम प्रयास कर सकते हैं इसके बारे में विस्तृत रूप से बताया। बच्चों के मानवाधिकारों के बारे में भी अवगत कराया।
जयपुर एकल महिला मंच की अध्यक्ष कु हेमलता कसोटीया के द्वारा दलित बच्चों के अधिकार क्या होते हैं तथा उनके अधिकारों को कैसे प्राप्त किया जा सकता है। इन सब के बारे में विस्तार से बताया गया। हेमलता का कसोटीया ने आगे बताते हुए कहा कि उनके प्रयासों से कई बालश्रम में लिप्त बच्चों को उन्होंने बाल श्रम से निकाला और शिक्षा से जोड़ा। किस प्रकार से बाल अधिकारों का खनन होता है और सरकारों का रवैया उनके प्रति संवेदनशील नहीं है इन सबके बारे में विस्तार से बताया।बाल अधिकारों का खनन होने पर किस तरह से हमें काम करना चाहिए इन सब के बारे में भी विस्तार से अपने अनुभव साझा किएऔर बताया कि बालकों के अधिकारों को सुनिश्चित करना हम सब की जिम्मेदारी है।
दलित अधिकार केंद्र के निदेशक एडवोकेट सतीश कुमार के द्वारा बच्चों से संबंधित संवैधानिक व कानूनी उपायों पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताते हुए कहा की संविधान में सभी के अधिकारों का वर्णन किया गया है बालकों के अधिकार भी उतने ही महत्वपूर्ण है जितने वयस्कों के। बालकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। हमें उनके अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए अधिक सक्रियता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि बालकों के लिए विभिन्न प्रकार के कानून बने हुए हैं जिनकी पालन पूरी तरह से नहीं हो रही है अतः हमें बालको पर बने कानूनों को पूर्ण रूपेण लागू करवाने के लिए और भी अधिक सक्रियता के साथ प्रयास करने होंगे तथा उनके अधिकारों का सुनिश्चित करना होगा।
बाल कल्याण समिति जयपुर के पूर्व सदस्य व वरिष्ठ अधिवक्ता राजस्थान हाई कोर्ट जयपुर के सतपाल चंदोलिया ने दलित बच्चों की स्थिति के संदर्भ में CWC तथा अन्य प्राधिकरणों की भूमिका के बारे मेंबताया। उन्होंने बताते हुए कहा के बालकों के साथ उनके ही अपनों के द्वारा सबसे अधिक घटनाएं कारित की जाती है जिन पर रोकथाम बहुत जरूरी है। विभिन्न प्रकार के शोषण और अत्याचार जो बच्चों के ऊपर होते हैं उनमें सीडब्ल्यूसी एक बहुत अच्छा रोल अदा करती है। सीडब्ल्यूसी के द्वारा हम बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित कर सकते हैं। जिन बच्चों का कोई नहीं होता उनके लिए सीडब्ल्यूसी उनका परिवार और उनका सब कुछ होता है। हम सभी को मिलकर के बच्चों के ऊपर होने वाले अत्याचार और शोषण को रोकने के लिए सबको लड़ाई लड़नी होगी और बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करवाना होगा।
सीडब्ल्यूसी की वर्तमान अध्यक्ष शीला सैनी द्वारा सीडब्ल्यूसी की भूमिका के बारे में और उनके कार्यों के बारे में बताते हुए कहा गया कि किसी भी प्रकार के अत्याचार और शोषण से शोषित 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सीडब्ल्यूसी पूरी तरह से उनके लालन पालन और सुरक्षा तथा उनको न्याय दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। सीडब्ल्यूसी के पास बालश्रम, मानव तस्करी आदि कई प्रकार के कार्यों में लिफ्ट बच्चे आते हैं और सीडब्ल्यूसी उन्हें उनके भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए जो भी महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए सीडब्ल्यूसी वह सारे कदम उठाती है और बच्चे को अच्छे से अच्छा भविष्य निर्माण करने के लिए पूरा प्रयास करती है।
सीडब्ल्यूसी के वर्तमान सदस्य रामनिवास सैनी , वर्तमान सदस्य शांति भटनागर, वर्तमान सदस्य शिमला कुमावत तथा वर्तमान सदस्य निजाम अहमद के द्वारा भी सीडब्ल्यूसी के कार्य तथा बच्चों को किस प्रकार से सीडब्ल्यूसी मदद करती है। इन सब के बारे में अपने-अपने अनुभव साझा किए। सभी ने बताया कि वर्तमान समय में बच्चों को शिक्षा से जोड़ना उनके माता-पिता को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 किसी भी बच्चे को कोई भी परेशानी होने पर फोन कर सकते हैं और उन्हें यथा संभव मदद दी जाती है। मुश्किल में फंसे हुए बच्चों को सीडब्ल्यूसी के समक्ष ला सकते हैं। सभी ने पॉक्सो तथा जे जे एक्ट के बारे में भी बताया। सभी ने बताया कि देश के भविष्य को संभालना है तो हम सभी को बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित रखना होगा।
दलित महिला मंच कि राज्य समन्वय कश्मीरा सिंह ने भी बच्चों के साथ उनके घर परिवार में होने वाले भेदभाव के बारे में बताया और सभी को समझाया कि बच्चों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए उन्हें समानता के साथ रखना चाहिए हमें हमारी बच्चियों को संस्कारित करने से ज्यादा जरूरी है लड़कों को संस्कारित करना जिससे उनकी मानसिक स्थिति अच्छी बने और बड़े होकर वह महिलाओं का सम्मान करना सीखें और किसी तरह की घटनाएं कारित नहीं करें इस प्रकार की सोच को पूरे समाज में विकसित करना होगा। उन्होंने आगे बताते हुए कहा कि विभिन्न प्रकार के कानूनों के होने के बावजूद भी वर्तमान समय में जिस प्रकार से अत्याचार और शोषण की घटनाओं में वृद्धि होती जा रही है वह अत्यंत चिंतनीय और विचारणीय है। हम सभी को अपने अपने स्तर पर और सरकार के साथ संवाद करके कानून का सही क्रियान्वयन करवा करके तथा समाज में जागरूकता लाकर इन सबको रोकना होगा तभी हम बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करवा सकते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता व सेवानिवृत्त व्याख्याता गिरधारी लाल ने भी बच्चों के भविष्य को संरक्षित रखने के लिए सभी से अपील की और सभी से संकल्प लिया की सभी मिलकर बच्चों के सभी अधिकारों को सुरक्षित और सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे।
दलित अधिकार केंद्र की दौसा जिले की सह समन्वयक द्रोपती जोनवाल, गंगापुर सिटी जिले के जिला समन्वय मनोज कुमार, शहर समन्वयक मीरा बेरवा एवं करौली जिले की सह समन्वयक शशि राजोरिया ने भी अपने-अपने जिलों में दलित बच्चों की स्थिति के बारे में अवगत कराया।
एडवोकेट सुरेंद्र कुमावत , एडवोकेट रामदयाल सामाजिक कार्यकर्ता शबाना, सामाजिक कार्यकर्ता रूकम सिंह , सामाजिक कार्यकर्ता सीताराम जी के द्वारा भी अपने-अपने विचार रखे गए।
शिविर में लगभग 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस प्रकार भीम गीत तथा प्रेरणा गीत के द्वारा शिविर का सफल समापन किया गया।

