Thursday, February 26, 2026
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जाति उच्चाटन

अगर हम सबको जाति का उच्चाटन करना हैं तो सभी एससी एसटी ओबीसी एनटी आदिवासी मूलनिवासी मायनाॅरीटीज अल्पसंख्याक ई. ई. सभिने यह जानना और मानना जरुरी हैं की हम प्रथमत: भारतवासी हैं और भारत हमारा देश हैं। यहाॅ की हर संपत्ती एवं हर वस्तूं पर हमारा हक हैं।

हम प्रथमत: भारतीय हैं। हमें अपने आप को समानतावादी दिखाना हैं। असमानता का प्रदर्शन करके नफरत को बढावा नही देना हैं। हमे संस्कारीत होना हैं अपने घर के अंदर अपने आगे की पिढीयों के भलाई हेतू , और संस्कार मन मे जगाए जाते हैं ना की रस्तों पर। अपनी पिढीयों को सर्वधर्मसमभाव पढाना हैं ना की जातिभेद।
हम समानता दिखाने हेतू अपने पहनावे और चालढाल को बदलना समय की माॅग है। आप कट्टरता वादी ना बने। इससे हम अपने बच्चोंको दंगोंमे झोंक रहे हैं। लोंगो के दिखावी पहनावे के असमानता के कारण नफरत को बढावा मिलता हैं। हम एकसमान साफसूथरे पढे़ लिखे नागरीक दिखायी देने चाहीए। ना की गॅवार हर समय अपनी जाति का प्रदर्शन करने वाले। हम बौद्ध धर्मिय हैं। तो बौद्ध धर्म के अनुसार आचरण करें।

किसी भी मिलनेवाले को हमे अपनी जाति या धर्म प्रसार हेतु नही मिलना है। हमे किसी ना किसी स्वंउपयोगी या परउपयोगी या समाजउपयोगी कार्य हेतु ही मिलना हैं। तो फिर नफरत कहासे आयेगी। हम खुद ही अपने व्यवहार से बातोंसे सामने वाले को नफरत करने हेतु उत्तेजित करते हैं, यह हमे रोकना हैं।

इसके करावा अगर हमारे साथ अन्याय अत्याचार हुआ तो फौरन पोलिस कंम्पलेट करे। वहाॅ भी सामनेवाला जबतक जाति अपमान का उल्लेख ना करे तबतक ॲट्रोसिटी केस ना डाले। पलभर सोचिए उससे बात करे, कितनी गंभीर सजा हैं ईस कायदे के तहत, बताए उस मुरख को। फिर भी ना समझे तो वह नासमझ हैं मानकर उसे छोड दे। क्योंकी उसपर निर्भर बच्चे, बुढों की हाय लेकर कौनसा न्याय पायेंगे हम। अत्यंत गंभिर मसले पर ही ॲस्ट्रोसिटी दर्ज करें। इस कारण हम दुसरे जातिधर्मियोंके मनमें नफरत के बिज ही बोते हैं।

हम भारतवासी संविधान निर्माता डॉ बाबासाहेब आंबेडकरजी को पूजने वाले हैं। उनके संविधान नुसार “सौ गूनहगार छुट भी जाए परंन्तु एक भी निर्दोष को सजा नही मिलनी चाहीए” इस बात पर गौर करे। जागृत नागरीक हेतू सतर्क रहे। कही पर किसीके भी साथ, अन्याय , कोई गैर हरकत, कुछ गलत हो रहा है तो फौरन हेल्प लाईन या नजदीकी पोलिस स्टेशन मे फोन करके सुचित करे।और ऐसे मामलोंमे खुद को ना झौंके, पलभर अपने उपर की जिम्मेदारी और परीवारको याद करे।

विश्वरत्न डाॅ.बाबासाहेब आंबेडकरजी ने प्रथम खुद को शिक्षित करके, ज्ञान हासिल करके, अपनेआप को इस काबिल बनाया की वह दुसरोंकें लिये लढ़ सके। उन्होंने उनके तीन गुरु क्रांतिबा ज्योतिबा फुलेजी, संत कबिरजी, और महा ज्ञानी गौतम बुद्ध, इसके विचारों अनुसार चलकर खुद को तय्यार किया। बाबासाहबजी ने रहन-सहन भी इस लायक बनाया की वह किसी ब्राम्हण से कम ना दिखे। उसके बाद समाज सुधार का बिडा उठाया। और आजकल अशिक्षित, गंवार, अनपढ़ , गंदे विचारोंसे भरे, कभी पुस्तकोंको हात भी नही लगाते ऐसे आंबेडकर जयंती में झेंडा लेकर सबसे आगे चलते हैं। मंच पर अध्यक्ष बनकर बैठते हैं। जिनको बाबासाहेब आंबेडकर जी का इत्तीभर भी ज्ञान नहीं वही आंबेडकरजी के नाम पर जहां देखो वहां चंदा मांगने बैठै होते हैं और हमारा भोलाभाला समाज ठगा जाता हैं।

एक जिम्मेदार भारतीय नागरीक होने के हक अदा करे। बच्चे, बुढे, अपाहीज, गर्भवती महीलाए, ई ई ओंकौ रास्तोंपर परेशानी मे दिखे तो आगे बढके मदत करे।हमारा क्षणिक समय उन्हें देकर हम अपने परीवार के लिए आशिर्वाद पाते हैं। अपने पुराने साफसूथरे कपडे, जुते, बिछौंने, पुस्तकें, उपयोग मे न आनेवाली घरकी वस्तुए गरीब बस्तियोंमे, अनाथ आश्रम मे, वृद्धाश्रममे, महीलाआश्रममे, दान करके पुण्य कमाए।हमें दान करते वक्त कोई जाति धर्म का भेदभाव नहीं करना हैं।अपने नजदीकी सरकारी अस्पतालोंमे ट्रस्टको, बिमारोंको अन्न, फल, दवाई, बिल की रक्कम, कपडे, दान करे। अपने घरके सभी सदस्यकी जन्मदिवस समारंभ किसी आश्रम मे अन्न वस्त्र दान कर आनंद और आशिर्वाद कमाए। जयभीम🙏🏻नमो बुद्धाय🙏🏻जय संविधान🙏🏻जय भारत
         — (भारतीय जागृत नागरीक)
     मूकनायक पत्रकार
   किर्तीसंध्या✍(मानसी पाठारे)
        महाराष्ट्र जि.ठाणे

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