मूकनायक
राजस्थान /अजमेर
ओमप्रकाश वर्मा
एक नींबू के साथ ऊपर और नीचे पांच या सात मिर्च धागे से बंधे बहुत से घर, दुकान व दफ्तर का चौखट पर लटके आपको देखने को मिल ही जाएगा।
नींबू-मिर्च लटकाने वालों का मानना होता है कि नींबू-मिर्च बुरी आत्मा व किसी की बुरी नजर से बचाते हैं। अब आप थोड़ा से तर्क लगाइए क्या कोई बुरी आत्मा या बुरी नजर है? कोई बुरी आत्मा नहीं होता। बुरी आत्मा होता तो आज तक किसी वैज्ञानिक ने उस आत्मा को खोज निकाल चुके होते।
न कोई बुरी नजर होती है। किसी की भी नजर बुरी नहीं होती हैं। अगर किसी व्यक्ति की नियत चोरी या डाका करना है, तो उसे नींबू-मिर्च से बंधे ठुवे रोक नहीं पाएगा और न ही रोका हैं। आए दिन सुने मकान में चोरी या दुकान से नगदी चोरी के मामले उसी घर और दुकान से सुनने में मिलती है।
इस अंधविश्वास के कारण नींबू-मिर्च की कीमत बढ़ गई हैं। हर रोज नींबू-मिर्च खरीदकर पुराना की जगह पर नया लटकाना। रोज सुबह-सुबह रोड, गली और रास्ते पर सुखा नींबू-मिर्च फेंके देखने को मिल ही जाएंगे। अंधविश्वासी राहगीर इससे बचने के चक्कर में आए दिन दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इस महंगाई से लोग खाने के लिए नींबू-मिर्च नहीं खरीद पा रहे, लेकिन अंधविश्वास के लिए अपनी जेब ढ़ीली कर रहे हैं। साथ ही अंधविश्वासी होने का परिचय दे रहे हैं।
नींबू लटकाने की शुरुआत एक अंधविश्वासी से हुई थी। अक्सर बिना विवेक के लोग भेड़ धसान चलते हैं। एक कुछ करें तो बिना सोचे-समझे उसके पीछे चलते हैं।
एक बार एक व्यक्ति बहुत बीमार पड़ता था। तब वह आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास गए। तब चिकित्सक ने उसे रोज नींबू-मिर्च खाने की सलाह दी। वह व्यक्ति रोज नींबू-मिर्च खरीदकर खाता और जो बच जाता उसे घर के चौखट पर लटका देता। नींबू से विटामिन सी और मिर्च से विटामिन ए मिलने लगा और वह स्वस्थ हो गया। यह देखकर उसके पड़ोसी भी इसकी नकल करने लगा। वह भी रोज नींबू-मिर्च खरीदकर चौखट से लटकाता। इस प्रकार यह अंधविश्वास का दौर शुरू हुआ। इसलिए किसी भी चीज को अपनी बुद्धि की कसौटी में कसिए फिर वह काम करिए।
नींबू-मिर्च के साथ ‘बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला’
मैं सड़क पर मोटरसाइकिल से जा रहा था,
मेरे सामने रिक्शा चल रही थी,
मैंने देखा,
रिक्शा के पीछे नींबू-मिर्च के साथ
बहुत भयानक चित्र के साथ लिखा था
‘बुरी नज़र वाले तेरा मुहं काला’
मैं दोबारा उसे फिर पढ़ा और
मेरी गाड़ी के आईने पर मैं अपनी सूरत देखा,
सच कहूं मेरा मुहं काला था,
लेकिन आप सब जानते है,
मेरी नजर बुरी नहीं है।
काला तो मैं बचपन से ही हूं,
लेकिन कुछ काला शहर की धूल,
प्रदूषण के कारण और भी काला हो गया था।
बुरी नजर कुछ नहीं होती है।
नींबू-मिर्च के टोटका किसके लिए?
मकान, दुकान, ठेले, घर के दरवाजे पर
नींबू-मिर्च लटके दिखाई देते हैं
कुछ समय हम मान ले,
शहर में बहुत अपराध बढ़े है
लेकिन अपराधी को पकड़ने के लिए होती है पुलिस
आज तक किसी टोटके ने अपराध को नहीं रोका,
न ही सड़क दुर्घटना से हमें बचाया।
तो नींबू-मिर्च के टोटके क्यों?
नींबू-मिर्च जब सूख जाते हैं
तब उसे रोड पर फेंक देते हैं।
अंधविश्वासी व्यक्ति जब रास्ते पर चलता है
उस टोटका से बचने के लिए
कहीं अपशगुन मेरे में न आए,
ऐसे सोचते हुए,
घबराते हुए चलता है।
यह भी देखने को मिला है कि
घबराहट के कारण दुर्घटना भी घटी है।
तंत्र-मंत्र, भूत-प्रेत, डायन
सब मन का भ्रम है।
अंधविश्वास, रूढ़िवाद व तमाम कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करें और बेहतर समाज बनाने के लिए संघर्ष करें।
✍️हरीराम जाट “मानव” नसीराबाद,अजमेर, राजस्थान

