मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी/ ओमप्रकाश वर्मा
सम्यक व्यवस्था परिवर्तनार्थ, ,बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी ने , आजादी के बाद, स्वतंत्रत भारत को लोकतन्त्र की व्यवस्था दी थी।
मनुवादी, षणयन्त्रकारी , भ्रष्टाचारी, निकम्मे परजीवी लोग,मिल कर उस संविधान ओर लोकतन्त्र की हत्या करने का प्रयास कर रहे हैं।
बिना श्रम के, दूसरों की सम्पत्ति को लूटने बाले सब एक हो गये हैं।सभी दल में पलक झपकते धनवान बनने बाले लोगों को, देशद्रोही , भ्रष्टाचारीयों को पहिचानों,उनका सामाजिक वहिष्कार करो,तृरिष्कार करो।
दु:ख इस बात का है कि मनुवादी सोच के साथ बुद्धि के विकलांग बहुलोकजन समाज के लोग भी लग गये हैं।
श्रमविहीन तरीकों से, धन कमाने की लालसा ने आदर्श, सिद्धांत, नैतिकता का हनन किया है, जहां आदर्श, सिद्धांत, नैतिक दायित्व नहीं होंगे,वहां कानून का राज नहीं, अराजकता होगी।
अब आपको तय करना है ,आपको स्वयं अपना मार्ग चुनना है, आपको निर्णय लेना है ?
आपको किस प्रकार की शासन-प्रशासन व्यवस्था में,ओर किन लोगों के साथ रहना है?
मनुवादी सोच अपनाना है ,या मानवता वादी तर्कसंगत बौद्धिक सोच के साथ , पारस्परिक आत्मनिर्भरता, पारस्परिक सहयोग से उन्नयनित सम्यक मानव जीवन जीना है?
तेरा मंगल,मेरा मंगल,सब का मंगल होय रे,—
भवतुसब्बमंगलम्
लेखक :::भागवत नारायण झांसी

