मूकनायक
ओमप्रकाश वर्मा
मध्य प्रदेश/महू
आज संकल्प दिवस है, वैसे तो हम सभी को बाबासाहेब के पूरे जीवन के प्रति कृतज्ञ होना ही चाहिए, लेकिन आज का दिन ऐतिहासिक महत्व का दिन है जब बाबासाहेब समतामूलक समाज की स्थापना के लिए अपने जीवन को समर्पित करने का प्रण लेते हैं, वो प्रतिज्ञा करते हैं कि विश्व के शिखर संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद मुझे मेरे देश में जातिगत भेदभाव, अन्याय, अत्याचार और अमानवीय शोषण सहना पड़ा तो मेरे अपने लाखों करोड़ों अनपढ़, अशिक्षित भाई बहनों को कितनी भयंकर यातनाएं सहनी पड़ती होगी, चाहे जो हो, इस नरकीय जीवन से मैं उन्हें बाहर लाकर ही रहूंगा, इस अन्याय, अत्याचार और शोषण को मैं जड़ से खत्म करके ही रहूंगा।
हालांकि ये कोई करिश्मा नहीं था, इसके पीछे महामानव बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर और उनकी पत्नी पूज्य माता रमाबाई का अथक संघर्ष और बलिदान ही था। उन्होंने समाज के लिए लगभग अपने आप को झोंक दिया था। अपने 4 बच्चों का बलिदान दिया। कईयों घंटो तक एक सी अवस्था में बैठकर अध्ययन किया और किताबे लिखी, असाधारण प्रतिभा ही ऐसा कर पाती हैं।
अपने 65 साल के छोटे से जीवन में बाबासाहेब ने हजारों वर्षों की गुलामी की जंजीरों को तोड़कर करोड़ों करोड़ लोगों को ना सिर्फ मुक्त कराया बल्कि उनके सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक उत्थान के सारे इंतजाम भी कर गए। वो कहते थे कि “मेरे मरने के बाद कोई तुम्हारा हाथ ना पकड़ सके इसके सारे प्रबंध मैं कर जाऊंगा।” और वास्तव में अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर उन्होंने जो कहा उसे पूरा भी किया।
आज हम देखते हैं कि हमारे लोग आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, उद्योगपति है बड़े बड़े पदों पर आसीन हैं किसकी बदौलत? सिर्फ और सिर्फ बाबासाहेब और उनके संकल्प की बदौलत…
बड़ौदा रियासत के सयाजी बाग में रात के समय बहुत ही दुखी मन से, रोते हुए बाबासाहेब अम्बेडकर ने संकल्प ना लिया होता, तो क्या होती हमारी स्थिति ? हमारे मसीहा के आंसुओ ने करोड़ों लोगों की आने वाली हजारों पीढ़ियों का जीवन सुखमय और खुशहाल बना डाला।
लेकिन हममें से कितनो को इसकी जानिब एहसास है?
आईए, हम सभी उसी संकल्प को पुर्नस्थापित करने के लिए प्रण ले, यह शिक्षा ले कि जिस कारवां को बाबासाहेब ने आगे बढ़ाया है हम उसे किसी भी सूरत में सिर्फ आगे ही ले जायेंगे और उसे कभी पीछे नहीं होने देंगे, खुद को, पत्नी को, माता पिता को, बच्चों को, पूरे परिवार को बाबासाहेब के कार्यों के प्रति जागृत करेंगे।
यही हमारा संकल्प हो, आज के दिवस पर महामानव बाबासाहेब को कोटि कोटि नमन। जयभीम, नमो बुद्धाय
लेखक:भंते प्रज्ञाशील
अध्यक्ष
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर मेमोरियल सोसायटी (भीम जन्मभूमि महू)

