Thursday, February 26, 2026
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वजीरपुर में दलित कार्यकर्ताओं का तीन दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिविर सपन्न

मूकनायक
ओमप्रकाश वर्मा

राजस्थान /गंगापुर सिटी /हिंडौन सिटी/
बजीरपुर

दलित अधिकार केंद्र द्वारा दिनांक 7 से 9 सितंबर 2024 को रॉयल पैलेस मैरिज गार्डन वजीरपुर, जिला गंगापुर सिटी में दलित कार्यकर्ताओं का जिला स्तरीय क्षमतावर्धन प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया प्रशिक्षण शिविर में दलित अधिकार केंद्र के निदेशक एडवोकेट सतीश कुमार ने एससी-एसटी एक्ट 1989 के बारे में बताया बताते हुए कहा कि एससी/ एसटी एक्ट दुनिया का सबसे अच्छा व प्रभावशाली कानून है लेकिन पुलिस प्रशासन की उदासीनता व संवेदनशीलता के अभाव के कारण से इस कानून की प्रभावी पालन नहीं हो रही इसलिए हम सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि आप लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर कहीं पर भी दलित लोगों पर अत्याचार होता है तो इस एक्ट के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कैसे करवाएं इस पर प्रकाश डाला और आपने कहा कि पुलिस प्रशासन व अत्याचार करने वाले समुदाय के लोग यह कहते हैं कि एससी/ एसटी एक्ट का दुरुपयोग होता है लेकिन दलित अधिकार केंद्र का मानना है कि अभी तो इस कानून का उपयोग ही शुरू नहीं हुआ है दुरुपयोग कहां से होगा। क्योंकि अभी तक तो पूरे कानून का प्रचार- प्रसार ही नहीं हुआ है कानून के प्रति पुलिस प्रशासन संवेदनसील नहीं हुआ है अतः हमारी सामाजिक कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी बनती है कि हम कानून के दायरे में रहकर पुलिस प्रशासन जन प्रतिनिधियों तथा कानून की पालना करने वाले उच्च अधिकारियों को संवेदनशील करने का काम करें
दलित अधिकार केंद्र के मुख्य कार्यकारी एडवोकेट हेमंत मिमरोट ने दलित अधिकार केंद्र के मिशन, विज़न तथा प्रशिक्षण शिविर के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि दलित अधिकार केंद्र दलित अत्याचारों की मॉनिटरिंग करता है। गंभीर केसों की फैक्ट फाइंडिंग करता है। दलित कार्यकर्ताओं को एससी/एसटी एक्ट ,मनरेगा,आरटीआई, भारतीय न्याय संहिता, महिला अधिकारों के बारे में कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देता है पुलिस प्रशासन के साथ में मिलकर एडवोकेसी करता है तथा सरकार व जनप्रतिनिधियों के साथ में मिलकर कानून की पालना करवाने के लिए दबाव समूह का काम करता है।
दलित अधिकार केंद्र के सहायक निदेशक एडवोकेट चंदा लाल बैरवा ने विधायिका में प्रशासनिक एडवोकेसी पर दस्तावेजीकरण के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला आपने कहा कि दस्तावेजीकरण पर प्रकाश डालते हुए आपने कहा कि न्याय की लड़ाई में दस्तावेजों का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है यदि कार्यकर्ताओं का दस्तावेजीकरण कमजोर होगा तो कानूनी लड़ाई नहीं लड़ सकते अपने विधायिका के बारे में बोलते हुए कहा कि प्रजातंत्र के चार स्तंभ होते हैं विधायिका, कार्यपालिका,न्यायपालिका व मीडिया विधायिका कानून बनाने का काम करती है। कार्यपालिका उसे कानून को लागू करने का काम करती है बने हुए कानून को लागू करने में कहीं परेशानी आती है तो न्यायपालिका इसका निर्णय करती है। इसलिए विधायिका, कार्यपालिका व न्याय पालिका का प्रजातंत्र में बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। इस प्रशिक्षण शिविर के मुख्य अतिथि
वजीरपुर नगर पालिका के चेयरमैन मुकेश कुमार बैरवा ने कहा कि हमारे लोगों को शिक्षित होकर ऊंचे पदों पर जाना होगा, स्वरोजगार करना होगा,आर्थिक रूप से सक्षम होना, योग्य व सक्षम जनप्रतिनिधि बनाकर समुदाय का विकास करना होगा तभी हमारे समुदाय का विकास हो सकता है दलित कार्यकर्ता न्याय दिलाने की दिशा में अपनी भूमिका कैसे अदा कर सकते हैं तथा सामाजिक न्याय के बारे में बताया। आपने कहा कि जब तक हमारे कार्यकर्ता शिक्षित होकर सक्षम नहीं बनेंगे अत्याचारों के विरोध आवाज में नहीं उठाएंगे तब तक हमारा समाज विकास नहीं कर सकता विकास करने के लिए हमको बाबा साहब के मार्गदर्शन पर चलना होगा।
दलित महिला मंच की राज्य समन्वय कश्मीरा सिंह ने पितृ सत्ता से महिलाओं को निजात दिलाने, घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा निषेध, पॉक्सो एक्ट, जेंडर बजट, एससी/एसटी एक्ट में महिलाओ के अधिकार व अन्य विभिन्न महिला कानून एवम अधिकारों के बारे में बताया। आपने कहा कि महिलाएं दोहरी शोषण का शिकार होती है इसलिए महिलाओं को विकास की मुख्य धारा में जोड़ने के लिए महिलाओं को साथ लेकर चलना पड़ेगा। पितृसत्ता सोच व दलित महिला होने के कारण से महिलाओं के साथ में दोहरा शोषण होता है इसलिए हम सबकी जिम्मेदारी है कि महिलाओं को शोषण से मुक्त करें और महिलाओं के लिए बने कानून व अधिकारों की जानकारी दें तथा उनको समाज के मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास करें। महिलाओ के सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक अधिकार उन्हें अवश्य मिलने चाहिए जिससे महिलाएं समाज में योगदान दे सके और आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार, समाज और देश के विकास में अपना योगदान दे सके।
दलित अधिकार केंद्र की राज्य समन्वयक खुशबू सोलंकी ने कार्यस्थल पर यौन शोषण अधिनियम के बारे में प्रकाश डाला और कहा की कामकाजी महिलाओं को उनके अधिकारों के बारें में पता होना चाहिए। तौफीक नदीम डाटा मैनेजर ने विशाखा गाइडलाइन के बारे में प्रकाश डाला। इस अवसर पर जिला समन्वय करौली से मीठालाल जाटव, जिला समन्वयक गंगापुर सिटी से मनोज कुमार जाटव राज्य समन्वयक, मांगीलाल बेरवा आदि कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखें तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में गंगापुर करौली जिले के सैकड़ो महिला व पुरुष कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण शिविर के अंत में दलित अधिकार केंद्र के जिला समन्वयक मनोज कुमार ने सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस प्रकार तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का सफल आयोजन किया गया।

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