Thursday, February 26, 2026
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त्रिरत्न बुद्ध बिहार में वर्षाबास निमित्त धम्मदेशना धम्म की आवश्यकता क्यों इसके महत्व को बताया पूज्य भदंत धम्मतप ने

मूकनायक

ओमप्रकाश वर्मा

राजस्थान/डोंगरगढ़

डोंगरगढ़। एक भारत बौद्धमय भारत निर्माण हेतु धम्मरथ पहुंचा डोंगरगढ़ जहां त्रिरत्न बुद्ध विहार की उपासिकाओं एवं उपासकों के द्वारा स्वागत किया गया। पूज्य भदन्त धम्मतप राजनांदगांव का वर्षावास निमित्त धम्मदेशा का कार्यक्रम आयोजित किया गया। भदन्त जी ने वर्षावास के काल में उपोसत शील के महत्व को समझाते हुए धम्म मनुष्य के लिए है या नहीं इस पर से पर्दा हटा दिया। भिक्खु धम्मतप आगे कहते है अपने आपको नास्तिकवादी समझने वाले के लिए भी धम्म है पहले तो हमें धम्म क्या है उसे समझना होगा फिर वो हमारे जीवन में कैसे कार्य करता है, उसके होने से जीवन में क्या बदलाव आता है, क्या स्वरूप होता है इसके बारे में बताते हुए कहते है भगवान गौतम बुद्ध के चौरासी हजार उपदेश धम्म स्कंध है। लेकिन हम सहज भाव एवं सरल शब्दों में समझने लिये एक उदारण को देखेंगे एक व्यक्ति जंगल में विचरण करते हुए अपनी ओछी हरकतें करता फिरे वो सही है क्या ? धम्म है क्या ?। भन्ते आगे कहते है एक से दो व्यक्ति जहा होते है वहा धम्म काम करता है क्यों ना वो पति – पत्नि ही हो, क्यों ना वो सगे संबंधि ही हो, जहा शील, सदाचार व नैतिकता का आरचण होता है, बाते होती है उसे धम्म कहते है क्योंकि एक दुसरे के कार्यशैली में धम्म ना दिखने के बाद उसे वो बताया जाता है ताकि धम्म को जान सके इसलिए जिस परिवार में आपस में शील, सदाचार व नैतिकता का व्यवहार होता है वो परिवार सुखी जीवन जिता है उसके परिवार से कलह दूर हो जाता है आपस में समन्वय के साथ – साथ मैत्री निर्माण होती है। कार्यक्रम में कौशल खोब्रागड़े राजनांदगांव व एच. के. आजाद डोंगरगढ़, तीर्थ राज भावे जी, अनिल लांडगे, नितिश मेश्राम ने संबोधित किया।कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आयु. चंदना भावे, अनुपमा लांडगे, प्रीति मेश्राम, निधी चंद्रीकापुरे, पूजा मेश्राम, अरूणा, गजभिये, सविता मेश्राम, अनिपमा लांडगे, विजेता गणवीर, स्मिता बागड़े, श्रद्धा चंद्रीकापुरे,प्रज्ञा मेश्राम, श्रावणी भावे, वामन चंद्रिकापुरे, संजय फूले, टेकचंद लांजेवर, संघर्ष लांडगे, रत्नदीप चंद्रीकापुरे आदि ने परिश्रम किया एवं उपासक व उपासिका कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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