Thursday, February 26, 2026
Homeराजस्थानकिसान की आत्महत्या

किसान की आत्महत्या

मूकनायक

ओमप्रकाश वर्मा

राजस्थान/

हिंडौन सिटी

साथियों एक गरीब किसान की कहानी को लिखते हुए पूरी पढ़ने के बाद मैं अपने आंसू नहीं रोक पाया आप लोग अगर पूरी पड़ेंगे तो एक गरीब किसान का दर्द समझ जाएंगे। आखिर कैसी परिस्थितियों में किसान आत्महत्या करता है। अंधकार से उभरते हुए नई ऊर्जा के साथ सूर्य की सुनहरी महक से आंखों के आलस को हाथों की अंगुलियों से कुचलते हुए प्रभात की पहरी में पक्षियों की चहचहाट के सुर को कर्णइंद्रियों ने कंपन को रोक कर नित दिनचर्या से निवृत होकर मुट्ठी भर बीज को दो बैलों की जोड़ी के साथ हल को कंधे में थामे हुए धरती माता से वंदना करता हुआ अपने सपनों को जमीन में गाड़ कर खून के आंसुओं से सींचते हुए इंद्र देव की बेरुखी से हताश होकर अपनी जीवन लीला को खत्म करने के विचार से दोनों बैलों को रस्सी से निजात देकर नीम के पेड़ पर फंदा टांग कर अंतिम सांस लेता है।
अचानक प्रकृति अपने प्रचंड रूप में तेज गर्जना के साथ बिजली कि चकाचौंध से धरती को जलमग्न करते हुए हवाएं रस्सी को पेड़ से अलग करती हुए रुकी हुई सांसो में जान पैदा कर जाती है। अपनी किस्मत को कुदरत का खेल मानता हुआ धरतीपुत्र अपने खेत की ओर देखता हुआ आंसुओं को खुशी में बदल कर घर की ओर रवानगी ले लेता है। परिवार के साथ सावन के मनमोहक गीतों में मंत्रमुग्ध होकर अपनी समस्या को बुलाकर जीवन के पहिए को भविष्य की ओर दखेलता है। फिर
अपनी टूटी हुई बैलगाड़ी को घसीटते हुआ धान को मंडी की ओर ले जाता है। सरकारी भाव (एमएसपी) मैं फसल को बेचने के लिए अधिकारियों से गुहार लगाता है परंतु फसल को गुणवत्ता से परे बता कर रद्द कर दिया जाता है। किसान फटी हुई आंखों से टपकते हुए आंसुओं से झुकी हुई गर्दन को अधिकारी के पैरों में गिरा देता है। साहब मेरे खून पसीने से फसल को पैदा करके सीधा खेत से लेकर आया हूं मेरी फसल खराब नहीं है एक बार आप दोबारा जांच करें किन्तु अधिकारी ने अपने पैरों को छुड़ाते हुए अपमानजनक शब्दों से किसान को लज्जित करता हुआ चला जाता है थोड़ी देर बाद व्यापारी आकर उस फसल को अपनी मनचाही दाम में खरीद कर ले जाता है किसान उन पैसों को अपनी पगड़ी में बांध कर घर की ओर रवाना होता है तभी उसके मन में विचार आता है कि मेरी बिटिया 18 साल की हो गई इन पैसों से बिटिया की शादी करके विदा कर देता हूं। किसान अच्छा मुहूर्त देखकर शादी की तारीख तह कर देता है। धूमधाम से शादी हो रही थी अचानक दूल्हे के बाप ने यह कहते हुए शादी करने(तोरण मारने से मना करना) से मना कर दिया कि आपने हमारी सामाजिक इज्जत के हिसाब से दहेज एवम व्यवस्था का आयोजन नहीं किया गया। मेहंदी लगी हुई हाथों से बिटिया अपने खेत के नीम के पेड़ से चुनरी का फंदा बनाकर झूलने के लिए निकलती है उधर किसान फिर से दोनों बैलों को रस्सी से निजात करके उसी पेड़ की ओर जीवन लीला समाप्त करने के मानस से निकल पड़ता। बाप और बेटी का इस तरह से एक साथ एक पेड़ के नीचे जीवन लीला समाप्त करने के दृश्य को प्रकृति सहन नहीं कर पाती फिर से अचानक तेज हवाओ और गर्जनाओ से पेड़ की टहनी टूटती हुई सैकड़ों मिलो तक उड़ती हुई दहेज के लालची परीवार के घर पर बैलों की रस्सी एवं चुन्नरी के फंदे से बंधी हुई घर पर गिरती है। दूल्हे का पूरा परिवार चक्रवात के प्रभाव से अपनी जीवन लीला खो देता है। किसान अपने बैलों की रस्सी को ढूंढता हुआ उस गांव तक पहुंचता है जहां उस पेड़ की टहनी से रस्सी बंधी हुई थी। किसान उस परिवार के सभी मृतकों का अपने स्तर पर अंतिम संस्कार करके वापिस अपने गांव की ओर लौटता है और अपने जीवन के घटनाक्रम को कुदरत का कहर मान कर फिर से सुखमय नींद में सोता हुआ सुनहरी सुबह का इंतजार करता है। आखिरकार इस देश के किसान को प्रकृति के अलावा किसी के ऊपर भी भरोसा करना गलत ही साबित होता है भले ही वह सगे संबंधी हो या सत्ता सरकार हो।

लेखक
आशाराम मीणा उप प्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक कोटा राजस्थान

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments