Thursday, February 26, 2026
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हिंदी ने खादी की तरह भारत को एक सूत्र में बाँधा-डॉ. सुधीर चतुर्वेदी

मुकनायक से राजबंश जामोर डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर भिंड

(माधव महाविद्यालय में हिंदी पखवाड़े का आयोजन हुआ)

ग्वालियर। मध्य भारत शिक्षा समिति द्वारा संचालित माधव महाविद्यालय में विगत 20 सितम्बर को हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत ‘स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी का योगदान’ विषय पर व्याख्यान एव हिंदी गौरव संवर्धन करने वाले साहित्यकारों की स्मृति में काव्य पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मध्य भारत शिक्षा समिति के शासी निकाय के अध्यक्ष डॉ.सुधीर चतुर्वेदी जी, विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व पार्षद एवं प्रसिद्ध गीतकार डॉ.करुणा सक्सेना जी उपस्थित रहीं। सान्निध्य शासी निकाय के सदस्य डॉ.विजय गंभीर जी का रहा एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. संजय रस्तोगी जी ने की। स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी के योगदान से नवांकुर पीढ़ी का साक्षात्कार करवाते हुये डॉ. सुधीर चतुर्वेदी जी ने कहा कि- समाज तक अपनी बात पहुँचाने के लिये एक संपर्क भाषा की आवश्यकता पड़ती है और भारत में हिंदी से उत्तम संपर्क भाषा और कोई दूसरी नहीं हो सकती। उन्होंने स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी की भूमिका से विद्यार्थियों को अवगत करवाते हुये कहा कि -जिस प्रकार खादी के एक एक सुत ने मिलकर भारतवासियों में स्वाभिमान जगाने का काम किया था वैसे ही हिंदी ने भी पराधीन भारत के प्रत्येक नागरिक को एक सूत्र में बांधने का काम किया।स्वाधीनता के लिये प्राणपण से जुटे क्रांतिकारियों ने हिंदी के प्रभाव और महत्व को समझते हुये स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है जैसे नारे,जागृति फैलाने वाले अखबार,सूचना पत्रक इत्यादि प्रकाशित किये। विशिष्ट अतिथि डॉ.करुणा सक्सेना जी ने कहा कि- मातृभाषा के लिये कार्य करने के लिये हमेशा ऊर्जा बनी रहनी चाहिये क्योंकि मातृभाषा कभी भी प्रचलन से बाहर नहीं होती। मातृभाषा का प्रयोग करते समय हमें गरिमा का ध्यान रखते हुये शिष्ट एवं शुद्ध शब्दावली का प्रयोग करना चाहिए । उन्होंने अपना मधुर गीत ‘रोशनी है अंधेरा घना’ प्रस्तुत करने के साथ कार्यक्रम को एक नया आयाम प्रदान किया। अध्यक्ष की आसंदी से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुये डॉ.संजय रस्तोगी जी ने कहा- मुझे अपनी मातृभाषा हिंदी पर गर्व है भारत में अनेकता में एकता का गुण हिंदी भाषा के कारण ही क्रियान्वित होता रहा है और होता रहेगा। उन्होंने जी-20 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा हिंदी भाषा के प्रयोग की बात बताते कि-जब मातृभाषा के प्रति देश के सर्वोच्च जन प्रतिनिधियों में सम्मान का भाव होता है तो वह भाषा निश्चित ही अद्वितीय इतिहास रचती है। उन्होंने स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी की भूमिका को स्पष्ट करने के साथ ही इस बात की और संकेत किया कि जिस भाषा में जितना साहित्य सृजन होता है वह भाषा उतनी ही समृद्ध होती है और इस दृष्टि से हिंदी आज विश्व की बड़ी तीन भाषाओं में अपना स्थान रखती है। कार्यक्रम में सान्निध्य प्रदान कर रहे हैं डॉ.विजय गंभीर जी ने विद्यार्थियों के समक्ष बहुत सादगी से अपनी बात रखते हुये कहा कि- हिंदी हमारी पहचान है। हिंदी के बिना हमारा अस्तित्व शून्य है। यद्यपि औद्योगीकरण एवं प्रौद्योगिकी के कारण हिंदी की शब्दावली को हानि हो रही है किंतु औद्योगिक क्रांति के इस दौर में भी हमें अपनी जड़ों के प्रति समर्पण और गौरव का भाव रखना चाहिये क्योंकि अंग्रेजी हमें रोजगार दिला सकती है पर सामाजिक सम्मान औरअभिव्यक्ति का उत्कृष्ट शिखर हमें हमारी मातृभाषा ही दिलावती है। उन्होंने विद्यार्थियों से ‘अपने गणेश को ईश्वर गणेश ही रहने देना चाहिए उसे माय फ्रेंड गणेश नहीं बनना चाहिये’ जैसे सूत्र के माध्यम से भाषिक एवं सांस्कृतिक शुचिता बनाये रखने का आह्वान किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रस्तावन रखते कार्यक्रम विभागअध्यक्ष डॉ. शिवकुमार शर्मा ने हिंदी के वैश्विक परिदृश्य पर विचार रखने के साथ ही स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी के महत्व को माखनलाल चतुर्वेदी, महादेवी वर्मा,मैथिलीशरण गुप्त जैसे साहित्यकारों के स्मरण के द्वारा रेखांकित किया।
इस अवसर पर बी ए प्रथम वर्ष के विद्यार्थीयों-नेहा,भूमिका, राम,उदय,दीपांशु एवं अनुष्का ने लघुनाटिका ‘बाल विवाह’ का रोचक प्रदर्शन किया साथ ही अनुष्का,रिंकू केवट,बॉबी बाथम, आशीष त्यागी,दीया अग्रवाल, विकास बघेल, अनुराग नामदेव, अंकुर चौरसिया,व्याप्ति उमड़ेकर,लक्ष्मीनिधि,श्यामबाबू ने क्रमशःअटल बिहारी वाजपेयी, महादेवी वर्मा,हरिवंशराय बच्चन इत्यादि की कविताओं का पाठ करने के साथ-साथ स्वरचित रचनाओं को भी प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक श्रीमती कुसुमलता चौहान, डॉ. संतोष शर्मा, डॉ. संजय पांडे, डॉ.विकास शुक्ला,डॉ. राजेश मिश्रा,डॉ.नीलेन्द्र सिंह तोमर, डॉ.कौशलेंद्र अवस्थी,डॉ.विजय पांडेय,डॉ प्रशांत साहू डॉ. राकेश करहेरीय,डॉ.दीप्ति नारंग, डॉ.चंचल अवस्थी, डॉ.निवेदिता पांचाल, डॉ.प्रेक्षा नाईक, डॉ. दीपक शिंदे, डॉ.प्रेम सिंह सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन हिंदी विभाग की प्राध्यापकद्वय डॉ.मंदाकिनी शर्मा एवं डॉ. सरिता दीक्षित द्वारा किया गया । कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की पूर्व छात्रा एवं युवा रचनाकार सुश्री व्याप्ति उमड़ेकर ने एवं आभार बी.ए तृतीय वर्ष के छात्र राजीव दोहरे ने किया।

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