दिल्ली में सीवर मजदूरों की संख्या हजारों नही एक हजार से कुछ ज्यादा है। दिल्ली में न्यूनतम मजदूरी अब ₹17,234 है, ₹16,500 पहले थी।
दिल्ली में कोई एक हजार से ज्यादा ठेके में काम कर रहे सीवर सफाई मजदूरों को ये नही पता है के वे किस ठेकेदार के अधीन काम कर रहे है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें रू 11,000 प्रति माह मिलते है जबकि दिल्ली की न्यूनतम मजदूरी की दर ₹17,234 है। इन मजदूरों का न तो पी एफ कटता न ही उन्हें मेडिकल की सुविधा मिलती है। सबसे हैरानी की बात है की उन्हें वेतन नगद दिया जाता है, जिसका भुगतान दिल्ली जल बोर्ड के अफसर खुद करते हैं। उन्हें किसी कागज़ या खाते में दस्तखत नही कराए जाते, न ही कोई रिकॉर्ड रखा जाता।
दिल्ली जल बोर्ड में चल रहे ठेकेदार घोटाले के बारे मीडिया में अब तक कोई खबर नहीं आई है। ये खुलेआम लूट ठेकेदारों और अफसरों के साठ गांठ से चल रही है। अब तक सीवर मजदूरों जो ज्यादातर एक खास दलित समुदाय से आते हैं के लाखों करोड़ों रुपए लूटे जा चुके है। क्या दिल्ली सरकार और उसके मंत्रियों को इस धोका-धडी की खबर नहीं, या फिर वे भी इस घोटाले में मुलव्वस है? इसकी तुरंत जांच होनी चाहिए, और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। भूताहा ठेकेदारों की शनाख्त होनी चाहिए और सभी मजदूरों को दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से जॉब कार्ड मिलने चाहिए और उनके वेतन का भुगतान उनके बैंक खाते में होना चाहिए।

