Thursday, February 26, 2026
Homeछिंदवाड़ाधिक्कार ! धिक्कार ! धिक्कार !

धिक्कार ! धिक्कार ! धिक्कार !

धिक्कार ! धिक्कार ! धिक्कार !
————————————
जल रहा आशियाँ किसी का,
और तुम तमाशा देख रहे हो ?
लूट रही अस्मत किसी बेटी की,
और तुम खामोश बैठे हो ?
धिक्कार ! धिक्कार ! धिक्कार !
याद रखना !
एक दिन….
ये क्रन्दन,ये दावानल,
तुम्हारे घर भी दस्तक देगा ।
फिर तुम …
क्या करोगे ?
किसे पुकारोगे ?
कौन साथ देगा तुम्हें ?
अभी वक़्त है !
दोस्त – दुश्मन को पहचानों,
ज़ुल्म के खिलाफ़ एक हो जाओ,
प्रतिकार करो ,
उठावो क़लम ।
वरना !
गूंगे बहरे बन जाओ,
किसी दड़बे में छुप जाओ,
कायरों की तरह।
मनाते रहो जश्न खुद की बर्बादी का,
करते रहो गुलामी अय्यारों की।
या !
क़लम को गमलों में सजा दो,
जंग लगने दो उसे,
शायद !
ईमानदारी,देशभक्ति का तमगा मिल जाये तुम्हें !!!

@ एस.आर.शेंडे, सौंसर, छिन्दवाड़ा ।

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments