======================== भारत राष्ट्र,भारतीय संविधान एवं मानव अधिकारों के रक्षार्थ बनाए गए राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर सर्किट हाऊस में मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल ऋषिकर भारती की अध्यक्षता में विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों की एक आवश्यक बैठक दिनांक 07/08/2022 को आयोजित की गई इस बैठक में सारंगढ़ के पूर्व बसपा विधायक एवं मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ छबिलाल रातरे ,सामाजिक संगठन मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सचिव एवं छत्तीस़गढ़ के प्रभारी रामफल मान्ड्रे, इंशाफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व तहसीलदार एफ आर जांगड़े ,आदिवासी शिक्षा पीठ के संचालक श्रीधर नेताम,सतनामी समाज के अन्तर्राष्ट्रीय संयोजक जगन्नाथ लहरे,मूलनिवासी अधिकारी कर्मचारी विंग के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव देवेन्द्र कुमार,मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा साउथ जो न के प्रभारी आर ए नारायण एम 3 के प्रदेश सचिव देवा भास्कर बौद्ध समाज के केंद्रीय प्रतिनिधि प्रवीण वाहने मुख्य रूप से उपस्थित थे बैठक में आगामी दिनांक 06/08/2022 को बिलासपुर कलेक्टर कार्यालय के समक्ष 25 सूत्रीय मांगो को लेकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर महामहिम राष्ट्रपति ,माननीय प्रधान मंत्री,माननीय मुख्य मंत्री एवं सभी जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन दिया जाएगा।
उपरोक्त मांगो में मुख्य रूप से जरूरत मंद बेरोजगारों और संविदा कामगारों जिनमे रसोइए,सफाई कामगार,आंगन बाड़ीकार्यकर्ता ,सहाईकाएं,अतिथि शिक्षको, होम गार्ड ,कोटवारों ड्राइवरों को न्यूनतम 25000/ रुपए तथा योग्यता के आधार पर अधिकतम 250000/रू प्रतिमाह वेतन का रोजगार दिया जाए तथा उनको स्थाईकरण किया जाए। आम गरीब जनता को बुनियादी सुविधाओं जिनमे निःशुल्क शिक्षा,चिकित्सा,पक्के मकान ,300 यूनिट बिजली,स्वच्छ पेयजल आदि की गारंटी दी जाए।अन्य पिछड़े वर्गो की वास्तविक गिनती कर उनको राजनीति एवं नौकरियों में आरक्षण दिलाने। लोकतंत्र के चुनाव में EVM पर बैन करके बैलेट पेपर से ही चुनाव करवाने।आरक्षित वर्गों को प्रमोशन में आरक्षण के साथ हाई कोर्ट,सुप्रीम कोर्ट,मिलिट्री के बड़े पदों पर तथा सभी निजी उद्योगों में भी आरक्षण दिए जाएं।जातिभेद,छुआछूत,लिंगभेद,साम्प्रदायिकता और अंधविश्वास फैलाने वाले धार्मिक परम्पराओं, संस्थानों,प्रचारकों तथा संगठनों को तत्काल बैन करके उनपर कड़ी कार्यवाही की जाए।गरीबों को उनकी वर्षों से काबिज जमीन और मकानों के पट्टे दिए जाएं।भूमाफियों द्वारा सरकारी और मूलनिवासियों की जमीनों पर अनावश्यक कब्जों को तत्काल हटाकर उन पर कड़ी कार्यवाही की जाए। विचाराधीन और साधारण मामलों में वर्षों से जेलों में पड़े लोगों को मानवीय दृष्टिकोण से उनको अविलंब जेलों से रिहा किया जाए।किसी जातिय भेदभाव, या राजनैतिक दुर्भावनावस किसी गम्भीर अपराधों में फंसाए गए लोगों को भी उनकी ईमानदारी से जांच करके उनको भी रिहा किया जाए।महिलाओं और अन्य कमजोर वर्गो पर होते जा रहे अन्याय अत्याचारों पर तत्काल अंकुश लगाया जाए।राष्ट्रीय बैंको संपत्तियों ,बड़े उद्योगों और संस्थानों का निजीकरण करना तुरंत बन्द कर बड़े निजी उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया जाए। विपक्षी नेताओं और उद्योगपतियों पर आए दिन दुर्भावना वस ई डी या सी बी आई जांच में फंसाने वाली कार्यवाहियों पर रोक लगाकर 100 करोड़ रुपयों से ऊपर निजी संपत्ति रखने पर बैन किया जाए और उस संपत्ति का राष्ट्रीयकरण किया जाए।इस प्रकार की 20 सूत्रीय मांगो को लेकर बिलासपुर में विशाल धरना और प्रदर्शन किए जाने की घोषणा इस बैठक के माध्यम से की गई।सभा को सभी वक्ताओं ने संबोधित किया ।अध्यक्ष्ता कर रहे गोपाल भारती ने कहा कि हम पिछले 4000 वर्षों से हमारे महापुरषों और पुरखो के द्वारा विदेशी जातिवादी पूंजीवादी दुश्मनों के खिलाफ भारतवासी मूलनिवासी समाज की असली आजादी की लड़ाई जो कि दुनिया की सबसे लंबी और महान लड़ाई है को अब 4 वर्षों के अंदर ही हम अब अंतिम रूप देने के संकल्प को पूरा करने में लगे हैं।हमारे लोगों ने अलग अलग 10 लाख सामाजिक और 2000 से ज्यादा राजनैतिक पार्टियां बनाकर टुकड़े टुकड़े में आपस में ही लड़ रहे हैं।इनमें से हम 10हजार सामाजिक और 100 राजनैतिक पार्टियों को एक कमान मिनिमम प्रोग्राम और एजेंडा के तहत राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा में एकजुट कर रहे हैं।किसी के संगठन को समाप्त करने नहीं बल्कि उनको संसद और विधान सभाओं में काबिज होने के लिए गठबंधन करके शासन कर्ती जमात बनाने की दिशा में ले जा रहे हैं।भारतीय जनता पार्टी और उनकी सरकारें हिन्दू राष्ट्र के नाम पर आज देश की जनता और भारत राष्ट्र पर अंग्रेज, औरंगजेब तथा मोहम्मद गौरी जैसे आक्रमणकारियों से भी ज्यादा खतरनाक हमलेवार बनकर महगांई,बेरोजगारी,दंगे फसाद और राष्ट्रविरोधी कार्य लगातार करते जा रहे हैं इसका मुकाबला अब केवल राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर संविधान सुरक्षा के तहत जनांदोलन ही एकमात्र रास्ता विकल्प बचा है।

