साहब….. हाॅस्टल में ठीक-ठाक भोजन नहीं मिलता
सीनियर अजा कन्या छात्रावास बैढ़न की छात्राएं पहुंचीं सिंगरौली, जनसुनवाई में अव्यवस्थाओं की खोल दी पोल
साहब…. मीनू के अनुसार हम लोगों को भोजन, नाश्ता नहीं मिलता। बजट की कमी बताकर भोजन, नाश्ते में कटौती की जा रही है। हाॅस्टल अधीक्षक से लेकर सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास भी हम लोगों की समस्याओं को अनसुना कर रहे हैं। ऐसे हालातों में हाॅस्टल में रहना बेहद मुश्किल है। यहां एक नहीं, कई समस्याएं हैं। बिजली, पानी का भी टोटा है। ये सभी बातें सीनियर अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास बैढ़न की दर्जनों छात्राओं ने बीते मंगलवार को कलेक्टोरेट, सिंगरौली में जनसुनवाई के दौरान कहीं। जनसुनवाई में छात्राओं ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, सिंगरौली को आवेदन देकर बताया कि हाॅस्टल में कई समस्याएं हैं। भोजन में प्रतिदिन दाल, चांवल व रोटी, सब्जी ही दी जा रही है। सब्जी में केवल आलू, बैगन व भिंडी तक ही सीमित है। वह भी रसोईये द्वारा अच्छे से नहीं बनाई जाती है। इसके अलावा नाश्ते के नाम पर केवल चाय ही मिलती है। महीने में एक-दो दिन विशेष भोजन का प्रावधान है, लेकिन वह भी हमें कभी नहीं मिलता है। पानी की भी घोर समस्या है। हाॅस्टल के सभी शौचालय जाम पड़े हुये हैं। इतना ही नहीं, इस भीषण गर्मी में हाॅस्टल के ज्यादातर पंखे भी बंद पडे़ हुये हैं। ऐसे में हमारा वहां रहना दूभर हो गया है।
मामले में संज्ञान लेकर मप्र मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री नरेन्द्र कुमार जैन ने कमिश्नर, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग, सतपुड़ा भवन, भोपाल, कमिश्नर रीवा संभाग, रीवा एवं कलेक्टर, सिंगरौली से तीन सप्ताह में तथ्यात्मक जवाब मांगा है।

