भोपाल, मंगलवार 28 जून 2022
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग में आवेदन लगाने पर आवेदिका श्रीमती वजीबाई पत्नी श्री मांगीलाल गौड़ को उनकी भूमि का कब्जा मिल गया है। मामला मंदसौर जिले का है। मंदसौर जिले के ग्राम झांकर्डा निवासी आवेदिका श्रीमती वजीबाई ने आयोग में एक नवम्बर 2021 को आवेदन लगाया था, कि उसकी निजी भूमि पर उसके गांव के ही अम्बालाल पाटीदार द्वारा जबरन अवैध कब्जा कर लिया गया है। वह कब्जा नहीं छोड़ रहा है, बल्कि उसकी जमीन पर लगे सीमा चिन्ह भी अम्बालाल के पुत्र ने उखाड़कर फेंक दिये हैं।
आवेदन मिलते ही आयोग ने मामला दर्ज कर लिया और प्रकरण क्र. 7956/मंदसौर/2021 में एसपी मंदसौर को समुचित कार्यवाही कर रिपोर्ट देने के आदेश दिये। आयोग ने मामले की निरंतर सुनवाई की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक के हवाले से कलेक्टर मंदसौर ने आयोग को यह रिपोर्ट दी है कि आवेदिका को उसकी निजी भूमि का कब्जा पुनः दिला दिया गया है। चूंकि आवेदिका को भूमि का कब्जा मिल गया है, अतः आयोग में यह मामला अब समाप्त कर दिया गया है।
पुलिस अभिरक्षा में लिए व्यक्ति का शीघ्र मेडिकल परीक्षण करायें और पावती अनिवार्य रूप से रिकाॅर्ड में भी रखें
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने एक मामले में अनुशंसा की है कि पुलिस अभिरक्षा में लिए गए व्यक्ति का दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 54(1) के अनुसार मेडिकल परीक्षण शीघ्र कराया जाये। गिरफ्तार किये गये व्यक्ति को या उसके द्वारा नामित व्यक्ति को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 54(3) के अनुसार चिकित्सा परीक्षण की एक प्रति उपलब्ध कराई जाये और उसकी पावती रिकाॅर्ड में भी अनिवार्य रूप से रखी जाये। आयोग ने इंदौर जिले के प्रकरण क्र. 0775/इंदौर/पुलिस/2020 में राज्य शासन को यह अनुशंसा की है। आयोग ने यह भी कहा है कि गिरफ्तारी के पश्चात् यदि आरोपी के परिजन या अधिवक्ता मिलने आएं, तो उनसे मुलाकात का अवसर नियमानुसार प्रदान किया जाये। पुलिस कर्मचारियों का बेसिक प्रशिक्षण एवं समय-समय पर विभाग द्वारा आयोजित रिफ्रेशर कोर्स में भी, मानवाधिकारों से संबंधित विषयों के अध्ययन के दौरान पुलिस अभिरक्षा में मृत्यु को रोकने से संबंधित सावधानियों/ वैधानिक जवाबदारियों/विभागीय निर्देशों की ओर उनका ध्यान आकर्षित कराया जाये। थानों में स्थित हवालातों को बंदी के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा एवं निगरानी हेतु सुदृढ़ किया जाये, ताकि निरूद्ध व्यक्ति अपने आपको नुकसान न पहुंचा पाये और उसकी निगरानी भी हो सके। थानों की हवालातों में लगे सीसीटीवी के माॅनिटर प्रधान आरक्षक लेखक, ड्यूटी आॅफिसर तथा एक अन्य कर्मचारी के पास भी उपलब्ध हों, ताकि निरूद्ध व्यक्तियों सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
उल्लेखनीय है कि इन्दौर के किशनगंज थाने में हत्या के आरोप में बंद एक आरोपी ने 28 जनवरी 2020 को कथित तौर पर कम्बल की किनोर फाड़कर, रौशनदान के जरिये फंदा (फांसी) लगाकर खुदकुशी कर ली थी। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश एवं अन्य संबंधित अधिकारियों से प्रतिवेदन मांगा था।

