Thursday, February 26, 2026
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ओम प्रकाश वाल्मिकी जी* – एक विख्यात विलक्षण आंबेडकरवादी विद्वान साहित्यकार के जन्मदिन 30 जून के अवसर पर मेरी *कलात्मक आदरांजलि।*

🖌️✍🏻 *Artist: HARI BHARTI*
Mobile-: 9717454430
ओमप्रकाश वाल्मीकि जी का जन्‍म 30 जून 1950 को मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) जिले के बरला गांव में एक अछूत वाल्‍मीकि परिवार में हुआ। उन्‍होंने अपनी शिक्षा अपने गांव और देहरादून से प्राप्‍त की। उनका बचपन सामाजिक एवं आर्थिक कठिनाइयों में बीता। आरंभिक जीवन में उन्हें जो आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कष्ट झेलने पड़े उसकी उनके साहित्य में मुखर अभिव्यक्ति हुई है। वाल्मीकि जी कुछ समय तक महाराष्ट्र में रहे। वहाँ वे दलित लेखकों के संपर्क में आए और उनकी प्रेरणा से बाबासाहेब डॉ.आंबेडकर की रचनाओं का अध्ययन किया। इससे उनकी रचना-दृष्टि में बुनियादी परिवर्तन हुआ। वे देहरादून स्थित आर्डिनेंस फॅक्टरी में एक अधिकारी के रूप में काम करते हुए अपने पद से सेवानिवृत्‍त हो गए।

*साहित्य*: इनके द्वारा लिखी गई उनकी स्वकथा *झूठन* में उन्होंने दलित वर्ग पर सवर्णों द्वारा जातीय भेदभाव, शोषण, वीभत्स उत्पीड़न से उत्पन्न समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट किया है। जिसके लिये *उन्हें 1993 में #डॉ_आंबेडकर_राष्ट्रीय_पुरस्कार* के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण सम्मान जैसे *परिवेश सम्मान, 8वां विश्व हिंदी सम्मेलन, न्यूयॉर्क, अमेरिका सम्मान, साहित्य भूषण पुरस्कार, न्यू इंडिया बुक पुरस्कार, कथाक्रम सम्मान* आदि देश-विदेशों में अलंकृत किया गया था । उनकी इस स्वकथा *झूठन* में किस तरह लंबे समय से भारतीय समाज व्यवस्था में सबसे निचले पायदान पर खड़ी *”#स्वच्छकार” जाति* का एक बालक ओमप्रकाश सवर्णों से मिली चोटों कचोटो के बीच परिस्थितियों से संघर्ष करता हुआ दलित आंदोलन का क्रांतिकारी योद्धा ओम प्रकाश वाल्मिकी बनता है। दरअसल यह दलित चेतना का दहकता हुआ दस्तावेज है।
उनकी प्रसिद्ध कविता संग्रह में *ठाकुर_का_कुआं,* सदियों का संताप, बस्स! बहुत हो चुका, अब और नहीं, शब्द झूँठ नहीं बोलते!
*कहानी संग्रह:* *सलाम*, घुसपैठिए, छतरी, अम्मा एन्ड अदर स्टोरीज
*आलोचना: #सफ़ाई_देवता*, मुख्यधारा और दलित साहित्य, दलित साहित्य का सौंदर्य शास्त्र।
*नाटक:* दो चेहरे, उसे वीर चक्र मिला था।

17 नवंबर, 2013 को 63 वर्ष की उम्र इस क्रांतिकारी विलक्षण साहित्यकार का देहादून में उनके निवास स्थान पर परिनिर्वाण हो गया।

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