Thursday, February 26, 2026
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उद्धव ठाकरे और शरद पवार की असली जीत मनुवादी हिंदुत्व से नहीं मानवतावादी बुद्धत्व से होगी.

गोपाल ऋषिकर भारती
राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा भारत (राष्ट्रीय संयोजक)

========================== भारत की राजनीति में महाराष्ट्र वैचारिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण राज्य रहा है। जैसा कि नाम से ही देखें तो महाराष्ट्र महार,मराठा ,मरार माली,मेहतर यानी महान योद्धाओं जिनमे मराठा छत्रपति शिवाजी एवं भिमा कोरेगांव के लड़ाकू महार योद्धाओं के शौर्य को चिन्हित करने वाले राज्य का प्रतीक नाम है। एक तरफ मुट्ठी भर मनुवादी पेशवा ब्राह्मण जो अपने को ऊंची जाती और गैर ब्राह्मणों को अपने से नीच वर्ण और जाती मानने वाली जातिवादी विचारधारा तो दूसरी तरफ बुद्ध, शिवाजी, फुले,अम्बेडकर की मानवतावादी विचारधारा का प्रतिनिधित्व इसी महाराष्ट्र से सम्पूर्ण देश में हो रहा है। आज भारत देश में जातिवाद,लिंगभेद,पूंजीवाद और छुआछूत को 4000 वर्षों पूर्व यूरेशिया से भारत हम्लेवार के रूप में भारत में आए मुट्ठी भर विदेशी घुसपैठियों की औलादों ने अपने को सुपर ब्राह्मण बताकर आर एस एस और भारतीय जनता पार्टी जैसे संगठनों के माध्यम से हिन्दू राष्ट्रवाद का नाम बड़ी चालाकी से देकर केंद्र की सत्ता काबिज कर ली है किन्तु तथागत बुद्ध , कबीर,गुरु नानक,शिवाजी महाराज जैसे महान संतो और महापुरषों की समानता,स्वतंत्रता,बंधुत्व और न्याय की मानवतावादी संवैधानिक विचारधारा को एक राष्ट्रवादी स्वरूप देने में एकरूपता नहीं हो पा रही है जबकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 1 में ही बाबा साहब अम्बेडकर ने इस देश का नाम भारत और अंग्रेजी में इसे इंडिया कहने वाला देश वाला कानून बना दिया है।इसको हिंदुस्तान,खालिस्तान,स्लामिस्तान कहना असंवधनिक ही नहीं तो राष्ट्रद्रोह है।हिन्दू कभी और कही पर भी राष्ट्रवाद नहीं बल्कि यह कास्टवाद और राष्ट्रद्रोह का ही दूसरा नाम है।
छत्रपति शिवाजी को मनुवादी पंडितों ने हिंदुत्व राज से जोड़कर बदनाम किया चलो मान लेते हैं तो शिवाजी कुनबी मराठा छत्री बताते हैं जब उनका राजर्षी तिलक करने की बात आई तो महाराष्ट्र के किसी ब्राह्मण ने स्वीकार नहीं किया उनका कहना था कि ये शूद्र वर्ण हैं इसलिए धन दौलत का रिश्वत लेकर यू पी के ब्राह्मण ने उनका पैर के अंगूठे से राजतिलक करना स्वीकार किया।यह ब्राह्मणों की एक शाखा का हिंदुत्व है। अब आर एस एस , भाजपा के हिंदुत्व और शिवसेना के हिंदुत्व की जांच कर लें तो इसका पूरा काला चिट्ठा भी सामने आ जाएगा शिवसेना के संस्थापक कायस्त जाती के बाला साहब ठाकरे को आर एस एस के मनुवादी ब्राह्मणों ने मोहरा बनाकर कांग्रेस और मराठा , महार ,माली, राजनीति के वर्चस्व को समाप्त करने के लिए मुंबई को केंद्र बनाकर खूब बढ़ावा दिया और उसकी छत्र छाया में अपनी भाजपा और हिंदुत्व की जातिवाद वाली विचारधारा को इसी महाराष्ट्र से ही स्व मुंडे जैसे पिछड़े वर्ग के नेताओं को आगे करके बढ़ाने का काम भारत भर में करते रहे।
बाला साहब ठाकरे इसलिए पसंद थे कि ओ मुख्य मंत्री ना बनकर ब्राह्मण जोशी को बनाते रहे जब उन्होंने मराठा को बनाना शुरू किया तब उनसे दूरी बनाते गए । बाला साहब ठाकरे के देहांत बाद भाजपा द्वारा शिव सेना को बहुत ही चालाकी से कमजोर किया गया और भाजपा ने पेशवा ब्राह्मण देवेन्द्र फडणवीस को मुख्य मंत्री बना दिया यह अपमानजनक बात उद्धव ठाकरे को शरद पवार ने अच्छी तरह समझा दिया और एन सी पी ,कांग्रेस का समर्थन देकर खुद उद्धव को उन्होंने सी एम बनवा दिया।ये हिंदुत्व कायस्ट,मराठा,मली जैसे गैर ब्राह्मणों का संवैधानिक हिंदुत्व कह सकते हैं जिसके खिलाफ भाजपा ने साजिश के तहत महाराष्ट्र की सरकार को EDऔर इनकम टैक्स का डर बताकर ब्लेक मेल तथा जातिवाद चलाकर गिराने का काम किया है।हम सभी भारत वासियों को इस खेल को अच्छी तरह इसे समझना होगा।भाजपा इस देश के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र और भारत राष्ट्रवाद को समाप्त करके जिस तरह मात्र 1% यूरेशियन ब्राह्मण जाति का गुंडा राज कायम करना चाहती है उसके खिलाफ सर्वसमाज को खुलकर राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा द्वारा चलाए जा रहे जनांदोलन में सामिल होना चाहिए।

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