मूकनायक प्रतिनिधी : बौद्धाचार्य अर्थदर्शी भंगीराजतिलक ( जिला फतेहपुर उ. प्र.)
जब-जब बहन मायावती मुख्यमंत्री बनी बाबा साहेब की विचारधारा को साकार करने के लिए और भारतीय संविधान को अपनी पार्टी का एजेंडा समझ कर समता-स्वतन्त्रता-करुणा-मैत्री-न्याय बंधुत्व के आधार पर शासन-सत्ता का संचालन किया है।
जहां बसपा देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में बहुजन महापुरुषों के नाम परअस्पताल-स्कूल-कालेज-जिला-मण्डल का नामकरण कर नये जिलों का निर्माण किया है।
वही बहुजन समाज के महापुरुषों से चिढ़ रखने वाली समाजवादी पार्टी की सरकारों में बहन जी द्वारा महापुरुषों के नामकरण किये गये किंग जार्ज हास्पिटल जिसे छत्रपति साहूजी महाराज के नाम पर नामकरण किया था उसे सपा सरकार में पुनः किंग जार्ज हास्पिटल कर दिया था।
छत्रपति शाहूजी महाराज नगर-अंबेडकर नगर-महामाया नगर संत रविदास नगर-कबीर नगर के नाम पर जिलों का नामकरण बसपा सरकार ने किया उनको सपा सरकार ने बदला। साहूजी महाराज नगर मण्डल का नाम बदल कर चित्रकूट मण्डल सपा सरकार ने किया था।
लखनऊ-नोएडा आदि जगहों में जब अंबेडकर स्मारक-कांशीराम स्मारक-बुद्ध स्मारक-जोतिबा फूले-कबीर-रविदास-सावित्रीबाई फूले-रमाबाई अंबेडकर के स्मारकों का जब बसपा सरकार निर्माण करवा रही थी, तब मुलायमसिंह यादव-अखिलेश यादव आदि समाजवादी पार्टी के नेता यह कहते थे कि मायावती पत्थरो में धन की बर्बादी कर रही हैं।
जबकि सच यह था कि बहन जी ने बहुजन समाज का गौरवमयी इतिहास का निर्माण किया था।
संसद में दलित प्रोन्नत आरक्षण का बिल सपा सांसद ने फाड़ कर दलित विरोधी सपा की विचारधारा होने का प्रमाण दिया था।
परंतु आज यह देख कर दुख हुआ की दलितों के मसीहा बाबा साहेब अंबेडकर को कांग्रेस ने दफन कर सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित कर दिया था, वही मान्यवर कांशीराम और बहन मायावती ने बाबा साहेब को सारे भारत में जिंदा कर दिया है।
बाबा साहेब के नाम पर अपना पेट पालने वाला उनका पोता प्रकाशराव अंबेडकर बसपा नेत्री बहन कुमारी मायावती के विरोधी सपा नेता अखिलेश यादव के मंच में आकर बहुजन मूवमेन्ट के खिलाफ जाने का संकेत दिया है।
मैं बौद्धाचार्य हूं मैं बुद्ध और बाबा साहेब की पदचिन्हों पर चलकर शासन-सत्ता की लड़ाई लड़ने वाली बसपा का जब समर्थन करता हूं तब मुझे कुछ बौद्ध धर्म को मानने वाले ज्ञानी-ध्यानी महापुरुष यह उपदेश देते हैं कि सिर्फ धम्म की बात करो राजनीति की नहीं।
अखिलेश यादव के मंच पर पूर्व सांसद सावित्रीबाई फूले के साथ बाबा साहेब के पोता प्रकाशराव अंबेडकर जो महाराष्ट्र में कुछ करने के लायक नहीं हैं वह यूपी की राजनीति में दलितों को गुमराह करने का संदेश दे रहे हैं।
वहीं जिस प्रकार चुनाव के दौरान भाजपा की सरकार बनवाने के लिए कुछ बिकाऊ बौद्ध भिक्षु नरेंद्र मोदी का प्रचारक बने थे, वैसे ही भंते सुमितरत्न महाथेरा भी शायद बिकाऊ भिक्षुओं के पदचिन्हों पर चलकर दलित-पिछड़े-बहुजन समाज की विचारधारा के विरोधी सपा नेता का समर्थन करने का निर्णय किये हैं।
आज बहुजन समाज पार्टी को खत्म करने की औकात भाजपा-कांग्रेस-सपा की नहीं है, परन्तु दलित-पिछड़े नेताओं की बसपा नेत्री के खिलाफ लामबंदी जरूर बहुजन मूवमेन्ट को कमजोर कर मनुवादी दलित-पिछड़ों की विरोधी पार्टियों को लाभान्वित करेगी।
मैं उत्तर प्रदेश के दलित-पिछड़े वर्ग के लोगों से यह जानना चाहता हूं कि समाजवादी पार्टी की भी उत्तर प्रदेश में कई बार सरकार बन चुकी है, सपा सरकार में बुद्ध-बाबा साहेब-कबीर-रविदास-जोतिबा फूले-साहूजी महाराज-सावित्रीबाई फूले आदि महापुरुषों की विचारधारा को फैलाने में क्या कोई काम किया है।
बसपा सरकार में बहन जी ने महामाया पेंशन योजना लागू की थी, जब अखिलेश यादव की सरकार बनी तब महामाया पेंशन योजना का नाम बदल कर रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर लागू किया था, कुछ माह बाद रानी लक्ष्मीबाई का भी नाम बदल कर समाजवादी पेंशन योजना कर दिया था।
.. बौद्धाचार्यअर्थदर्शी भंगीराजतिलक

